प्र1.
हमारे दैनिक जीवन में अनेक उपयोगी परिवर्तन होते हैं। उदाहरण के लिए दूध का दही बनना, फलों का पकना, फलों को काटना और भोजन पकाना। ये सभी वांछनीय परिवर्तन हैं। क्या आप अपने चारों ओर होने वाले कुछ अन्य वांछनीय परिवर्तनों के विषय में सोच सकते हैं?
उत्तर
हाँ — हमारे आस-पास होने वाले अनेक परिवर्तन उपयोगी एवं वांछनीय हैं।
- घर में: दही से मक्खन निकलना, खमीर से आटा फूलकर डबल रोटी का मुलायम होना, गीले वस्त्रों का धूप में सूखना, पीने के लिए जल उबालना, चावल पकना, चाय की पत्ती से जल में रंग आना।
- खेत एवं बगीचे में: बीज का अंकुरित होकर पौधा बनना, कलियों का खिलना, अनाज का पकना, रसोई के अपशिष्ट एवं सूखी पत्तियों का सड़कर खाद बनना।
- कारखाने एवं कार्यशाला में: मिट्टी से बर्तन एवं ईंटें बनना और पकना, लोहा पिघलाकर औजार ढालना, कपास से धागा एवं धागे से वस्त्र बनना, गन्ने के रस से गुड़ बनना।
- हमारे शरीर में: भोजन का पाचन, घाव का भरना, हमारी लंबाई का बढ़ना।
इसके विपरीत कुछ परिवर्तन अवांछनीय होते हैं — लोहे में जंग लगना, भंडारण के दौरान खाद्य पदार्थ का क्षय होना, ग्रीष्म ऋतु में दूध का फटना, रंग-रोगन सूखने के दौरान वाष्पीकरण से वायुमंडलीय प्रदूषण, तथा कारों, रेलों एवं हवाई जहाजों में ईंधन की बढ़ती खपत से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना।
ऐसा क्यों होता है: वांछनीय अथवा अवांछनीय होना परिवर्तन का अपना गुण नहीं, बल्कि परिस्थिति पर निर्भर करता है। भोजन का अपघटन रसोई में अवांछनीय है, परंतु खाद के गड्ढे में यही हमें चाहिए। गेट पर जंग लगना अवांछनीय है, परंतु वही अभिक्रिया बेसाल्ट चट्टान पर वह सुंदर लाल परत बनाती है जो पुस्तक के चित्र 5.10 (ख) में दिखाई गई है।