कुतूहल अध्याय 6 क्रियाकलाप 6.2: आइए, सूची बनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कुछ समय लेकर सोचिए और बताइए कि क्या आपके या आपके साथियों के संवेगों में और व्यवहार में विगत एक या दो वर्षों में कोई विशेष परिवर्तन आया है। ये परिवर्तन रोमांचक, भ्रामक अथवा दोनों प्रकार के हो सकते हैं। आइए, हम तालिका 6.2 में कुछ ऐसे संवेगात्मक परिवर्तनों और उनके कारण व्यवहार में होने वाले संभावित प्रभावों एवं सकारात्मक वृद्धि और विकास के प्रकारों को सूचीबद्ध करें।
उत्तर

किशोरावस्था में प्राय: बाल्यावस्था की तुलना में संवेग अधिक प्रबल होते हैं। भरी हुई तालिका 6.2 इस प्रकार है — आरंभिक प्रविष्टियाँ वही हैं जो आपकी पुस्तक में पहले से छपी हैं, शेष वे हैं जो कक्षाएँ सामान्यतः सूचीबद्ध करती हैं।

तालिका 6.2 — संवेगात्मक परिवर्तन, व्यवहार पर उनके संभावित प्रभाव तथा सकारात्मक वृद्धि एवं विकास के प्रकार
मुख्य संवेगात्मक परिवर्तनव्यवहार पर संभावित प्रभावसकारात्मक वृद्धि एवं विकास के प्रकार
मनोदशा में बारंबार परिवर्तनकिसी दिन अत्यधिक ऊर्जावान और प्रसन्न, किसी दिन उदास या चिड़चिड़ा; मित्रों या परिजनों पर झुँझलाना; अकेले रहने की इच्छासंगीत, नृत्य या खेल जैसी विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी; नींद, भोजन और व्यायाम की नियमित दिनचर्या
प्रबल संवेगसंवेदनशीलता में वृद्धि — बात जल्दी बुरी लगना, तीव्र प्रतिक्रिया देना, छोटी टिप्पणी दिल पर ले लेनाआत्म-अन्वेषण और ऐसी गतिविधियों में सम्मिलित होना जो रचनात्मकता और नवाचार को जन्म दें — लेखन, चित्रकला, बागवानी, विज्ञान परियोजनाएँ
दूसरों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धिवंचित और अभावग्रस्त व्यक्तियों के लिए गहरी अनुभूतिदया-भाव, सामाजिक कार्यों में भागीदारी — स्वच्छता अभियान, छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों की सहायता
अपने स्वरूप के प्रति सजगतास्वयं की सहपाठियों से तुलना; लंबाई, आवाज या मुँहासों को लेकर संकोचयह स्मरण रखना कि ये भिन्नताएँ पूर्णतः सामान्य हैं; तुलना के स्थान पर स्वास्थ्य, रुचियों और मित्रता पर ध्यान देना
अन्य कोई — स्वतंत्रता की इच्छाबड़ों से बहस, एकांत की चाह, सलाह का विरोध, साथियों से अत्यधिक प्रभावित होनाघर में छोटे-छोटे दायित्व लेना; निर्णयों पर माता-पिता और शिक्षकों से शांतिपूर्वक चर्चा करना
ऐसा क्यों होता है: इस अवस्था में शरीर में बनने वाले कुछ हार्मोन मनोदशा और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। अतः ये प्रबल संवेग आपकी कोई कमी नहीं, बड़े होने का एक भाग हैं।
सुझाव: यह समझना कि हमारे संवेग हमारे व्यवहार और कार्यों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, हमें बेहतर विकल्प चुनने और सोच-समझकर प्रतिक्रिया करने में सहायता करता है। जब कोई भावना बहुत प्रबल हो तो तुरंत प्रतिक्रिया न दें, थोड़ा रुकें और किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें।
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