प्र1.
निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिए। (i) ∩ × मेंढक-शिशु (ii) कुंडली × कमल (iii) कमल × कमल (iv) अँगुली × बैठा मनुष्य
उत्तर
हर बार 10 की घातें जोड़ दीजिए।
| गुणनफल | 10 की घातों में | उत्तर | |
|---|---|---|---|
| (i) | ∩ × मेंढक-शिशु | 101 × 105 = 101+5 | 106 — बैठा मनुष्य |
| (ii) | कुंडली × कमल | 102 × 103 = 102+3 | 105 — मेंढक-शिशु |
| (iii) | कमल × कमल | 103 × 103 = 103+3 | 106 — बैठा मनुष्य |
| (iv) | अँगुली × बैठा मनुष्य | 104 × 106 = 104+6 | 1010 |
अत: किन्हीं दो सांकेतिक संख्याओं का गुणनफल एक अन्य सांकेतिक संख्या ही होता है।
ऐसा क्यों होता है: भाग (iv) पर रुककर सोचिए। 1010 सांकेतिक संख्या तो है, परंतु मिस्र के प्रतीकों की सूची 107 (सूर्य) पर समाप्त हो जाती है। अत: यह उत्तर संख्या के रूप में विद्यमान है परंतु मिस्र संख्यांकों में लिखा नहीं जा सकता। यही वह कमी है जो पृष्ठ 69 पर बताई गई है — जिस पद्धति में प्रत्येक सांकेतिक संख्या का अपना प्रतीक हो, उसे प्रतीकों की अंतहीन आपूर्ति चाहिए।
संकेत: 1010 अर्थात एक हजार करोड़, या 1 के आगे दस शून्य। हमारी पद्धति में यह तनिक भी कठिन नहीं — वही दस अंक इसे भी संभाल लेते हैं।