गणित प्रकाश अध्याय 3 संख्याओं की कहानी के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
संख्याओं को निरूपित करने के लिए वस्तुओं, नामों या लिखित प्रतीकों का एक ऐसा मानक अनुक्रम चाहिए जिसका क्रम निश्चित हो — इसी को संख्या पद्धति कहते हैं। किसी संग्रह की गणना उससे एकैकी प्रतिचित्रण बनाकर की जाती है। लिखित संख्या पद्धति के प्रतीकों को संख्यांक कहते हैं। जिन संख्याओं का अपना प्रतीक होता है और जो संदर्भ बिंदु का काम करती हैं, उन्हें सांकेतिक संख्याएँ कहते हैं। यदि सांकेतिक संख्याएँ 1, n , n 2 , n 3 , … अर्थात किसी एक संख्या की घातें हों तो वह आधार- n पद्धति है। आधार-10 पद्धति को दशमलव पद्धति कहते हैं। आधार वाली पद्धति में दो सांकेतिक संख्याओं का गुणनफल भी एक सांकेतिक संख्या ही होता है — इसी कारण उसमें गुणा सरल है और रोमन पद्धति में कठिन। जिस पद्धति में प्रतीक की स्थिति यह तय करती है कि वह किस सांकेतिक संख्या को गिन रहा है, वह स्थानीय मान पद्धति है। मेसोपोटामिया, माया, चीन और भारत —
अभ्यास
- पाठ्य प्रश्न
- गणित चर्चा
- पाठ्य प्रश्न
- आइए, पता लगाएँ
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- आइए, पता लगाएँ
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