प्र1.
मान लीजिए आप एक संख्या पद्धति का उपयोग कर रहे हैं जिसमें संख्याओं को दर्शाने के लिए छड़ियों का उपयोग किया जाता है जैसा कि विधि 1 में बताया गया है। हिंदू संख्या पद्धति के संख्या नामों या संख्यांकों का उपयोग किए बिना दो संख्याओं या छड़ियों के दो संग्रहों के जोड़, घटाव, गुणन और विभाजन की विधि बताइए।
उत्तर
चारों संक्रियाएँ केवल छड़ियाँ इधर-उधर रखकर की जा सकती हैं। दोनों संग्रहों को क और ख कहिए।
| संक्रिया | छड़ियों के साथ क्या कीजिए | उत्तर क्या है |
|---|---|---|
| क + ख | दोनों ढेरों को मिलाकर एक ढेर बना दीजिए। | मिला हुआ ढेर |
| क − ख | ख की प्रत्येक छड़ी का क की एक छड़ी से युग्म बनाकर दोनों हटा दीजिए। ख के समाप्त होने पर रुक जाइए। | क की शेष अमिलित छड़ियाँ |
| क × ख | ख की प्रत्येक छड़ी के लिए क का एक पूरा नया ढेर बनाइए। फिर उन सभी ढेरों को मिला दीजिए। | मिला हुआ ढेर |
| क ÷ ख | क में से बार-बार ऐसे बंडल निकालिए जिनका ख से एकैकी मिलान हो। प्रत्येक पूरे बंडल के पास एक चिह्न-छड़ी रख दीजिए। | चिह्न-छड़ियाँ भागफल हैं; क में शेष वे छड़ियाँ जो पूरा बंडल नहीं बना पातीं, शेषफल हैं |
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक नियम उस संक्रिया का अर्थ ही है, नामों से रहित। जोड़ना अर्थात संग्रहों को मिलाना; घटाना अर्थात मिलान किया गया भाग हटाना; गुणन अर्थात समान संग्रहों को बार-बार जोड़ना; भाग अर्थात समान संग्रहों को बार-बार घटाना — और भागफल है कितनी बार ऐसा हो सका, जो स्वयं एक संख्या है, इसीलिए उसके लिए भी चिह्न-छड़ियों का अपना संग्रह बनता है। यहाँ कहीं भी “सात” शब्द की आवश्यकता नहीं पड़ी।
स्वयं जाँचिए: क = 7 छड़ियाँ और ख = 3 छड़ियाँ लीजिए। 3-3 के बंडल निकालिए: दो बंडल बनेंगे (दो चिह्न) और 1 छड़ी शेष रहेगी। यही 7 ÷ 3 = 2, शेषफल 1 है — और एक भी संख्या बोले बिना।