गणित प्रकाश अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप अन्य दो प्रश्नों (प्रश्न 2 और प्रश्न 3) के उत्तर देने के लिए छड़ियों का उपयोग किस प्रकार करेंगे?
उत्तर

एक संग्रह का दूसरे से युग्म बनाकर और शेष को देखकर।

चरणछड़ियों के साथ क्या कीजिएइससे क्या ज्ञात होता है
1हमारी प्रत्येक गाय के लिए एक छड़ी; पड़ोसी की प्रत्येक गाय के लिए एक छड़ीदो संग्रह जो दोनों झुंडों को दर्शाते हैं
2दोनों ढेरों से एक साथ एक-एक छड़ी हटाते जाइएएकैकी प्रतिचित्रण बन रहा है
3हमारा ढेर पहले समाप्त होता हैहमारे पास कम गायें हैं (प्रश्न 2)
4कुछ गिनिए मत — उनके ढेर में शेष छड़ियाँ अलग रख लीजिएवही संग्रह बताता है कि कितनी और गायें चाहिए (प्रश्न 3)
ऐसा क्यों होता है: छड़ियाँ झुंड की सच्ची प्रतिकृति हैं, अत: झुंड से जुड़ा प्रत्येक प्रश्न छड़ियों से जुड़े प्रश्न में बदला जा सकता है — और छड़ियों को हटाया, युग्मित तथा अलग रखा जा सकता है, गायों को नहीं। इसीलिए संख्या-नामों के अस्तित्व से पहले भी वस्तुओं द्वारा संख्या निरूपण उपयोगी था।
प्र2.
आप अपनी भाषा के वर्णों की ध्वनियों का उपयोग करके इस प्रकार से कितनी संख्याओं को निरूपित कर सकते हैं?
उत्तर

जितने वर्ण आपकी भाषा में हैं, ठीक उतनी ही संख्याएँ — उससे एक भी अधिक नहीं।

अंग्रेजी: 26 वर्ण a, b, c, …, z → संख्याएँ 1 से 26
देवनागरी (हिंदी): 11 स्वर + 33 व्यंजन = 44 वर्ण → संख्याएँ 1 से 44
तमिल: 12 स्वर + 18 व्यंजन = 30 मूल वर्ण → संख्याएँ 1 से 30

कोई भी भाषा लीजिए, उत्तर सदैव एक निश्चित, सीमित संख्या ही होगा। अपनी वर्णमाला के वर्ण गिनिए — वही आपकी सीमा है।

ऐसा क्यों होता है: इस विधि में प्रत्येक संख्या वर्ण-क्रम का पालन करते हुए एक वर्ण से जोड़ी जाती है। एकैकी प्रतिचित्रण उस संग्रह से आगे कभी नहीं जा सकता जिसमें वह प्रतिचित्रित हो रहा है। अत: वर्णमाला सीमित होने के कारण एक सीमित मानक अनुक्रम देती है — और संख्याएँ अंतहीन हैं। यही इसकी कमी है: यह विधि गिनने में सुविधाजनक है परंतु रुक जाती है।
संकेत: इसकी तुलना छड़ियों वाली पद्धति से कीजिए। छड़ियों में संख्याएँ कभी समाप्त नहीं होतीं परंतु बड़े संग्रह के लिए वे असुविधाजनक हैं; वर्ण बोलने में सरल हैं परंतु समाप्त हो जाते हैं। हिंदू पद्धति ही दोनों बातें एक साथ साध पाती है।
प्र3.
क्या आप इसी प्रकार बड़ी संख्याओं को दर्शाने के लिए भी इस विधि का विस्तार कर सकते हैं? और कैसे?
उत्तर

हाँ — ठीक उसी प्रकार जैसे स्वयं रोमन पद्धति ने किया। प्रतीकों को दोहराते जाइए और जब दोहराव अधिक लंबा हो जाए तब एक नया प्रतीक ले आइए।

XX के बाद आगे बढ़िए: XXI, XXII, … XXIX, XXX (30), … XXXX अथवा XL (40)
50 के लिए XXXXX लिखने के स्थान पर नया प्रतीक: L
फिर LX, LXX, LXXX, XC … और 100 के लिए पुन: नया प्रतीक: C
तथा आगे: D = 500, M = 1000

अर्थात विस्तार दो चरणों में होता है: (क) उपलब्ध प्रतीक को दोहराइए, और (ख) जब लगभग पाँच दोहराव जमा हो जाएँ तब उस पूरे समूह को एक नए प्रतीक से बदल दीजिए।

ऐसा क्यों होता है: केवल दोहराव तो मिलान प्रतीक ही है — 1000 के लिए एक हजार चिह्न लगाने पड़ेंगे। 5, 10, 50, 100 पर नया प्रतीक ले आने से प्रत्येक संख्यांक छोटा रहता है। परंतु इसका मूल्य यह है कि प्रत्येक नई सांकेतिक संख्या के लिए एक नया प्रतीक चाहिए, अत: आप कितने भी प्रतीक बना लें, कोई न कोई संख्या पहुँच से बाहर रह ही जाएगी। इसका समाधान अनुभाग 3.4 में है — नए प्रतीक के स्थान पर प्रतीक की स्थिति का उपयोग कीजिए।
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