गणित प्रकाश अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आइए, नीचे दिए गए प्रत्येक बक्से में वस्तुओं की संख्या शीघ्रता से गिनें—
उत्तर

पृष्ठ 57 के नौ बक्सों को पंक्तिवार पढ़ने पर:

बक्सावस्तुएँक्या एक दृष्टि में दिख गया?
मुर्गियाँ2हाँ, तुरंत
पीले फूलों का गुच्छाइतने कि बता न सकेंनहीं — गुच्छा खोलकर गिनना पड़ेगा
लकड़ी की गुड़ियाँ4हाँ, कठिनाई से
सीढ़ी के पायदानलगभग 10नहीं — दृष्टि ऊपर तक ले जानी पड़ती है
कुत्ता1हाँ, तुरंत
अंगूर का गुच्छाइतने कि बता न सकेंनहीं
सेब6नहीं — अधिकांश लोगों को गिनना पड़ता है
पेंसिलेंलगभग 8नहीं — एक-एक करके गिननी पड़ती हैं
पिरामिड3हाँ, तुरंत
ऐसा क्यों होता है: बक्से जान-बूझकर ऐसे चुने गए हैं। जो तुरंत पढ़े जा सकते हैं — 1 कुत्ता, 2 मुर्गियाँ, 3 पिरामिड, 4 गुड़ियाँ — वे सभी छोटे हैं। जैसे ही किसी बक्से में 5 या अधिक वस्तुएँ आती हैं, आप संख्या देखना बंद करके उसे गिनना आरंभ कर देते हैं। अंगूर और फूल यही बात दूसरे छोर पर दर्शाते हैं।
प्र2.
आप गणना किए बिना ही किस आकार के समूह में वस्तुओं की संख्या तुरंत देख सकते हैं?
उत्तर

लगभग 4 तक। अधिकांश व्यक्तियों को एक बार में 5 या उससे अधिक वस्तुओं वाले समूह को गिनना कठिन लगता है।

ऐसा क्यों होता है: यह सीमा कोई गणितीय तथ्य नहीं, मनुष्य की आँख और मस्तिष्क का तथ्य है — और संख्यांकों के इतिहास पर इसकी छाप हर जगह दिखाई देती है। जैसे ही मिलान चिह्न पाँच तक पहुँचते, उन्हें एक दृष्टि में कोई नहीं पढ़ पाता था, अत: लोग पाँच चिह्नों के प्रत्येक समूह को एक नए प्रतीक से बदलने लगे। यही रोमन V है जो IIIII के स्थान पर आया, और X जो दो V के स्थान पर।
क्या आप जानते हैं? इसीलिए संख्या पद्धतियों में बार-बार वही छोटे, मानव-अनुकूल समूह आकार दिखाई देते हैं: 2 (गुमुलगल), 5 (रोमन V), 10 (दोनों हाथों की अँगुलियाँ — मिस्र और हिंदू पद्धति) तथा 20 (हाथ-पैर की अँगुलियाँ — माया पद्धति)।
प्र3.
ऐसी संख्या पद्धति का प्रयोग करने में क्या कठिनाइयाँ हो सकती हैं जो मात्र एक ही आकार के समूहों में गणना करती है? आप 1345 जैसी संख्या को उस पद्धति में कैसे निरूपित करेंगे जो मात्र 5 के बार-बार प्रयोग से गणना करती है?
उत्तर

कठिनाई यह है कि संख्यांक की लंबाई लगभग संख्या जितनी ही बड़ी बनी रहती है।

1345 ÷ 5 = 269  (क्योंकि 5 × 269 = 1345)
अत: 1345 = 5 + 5 + 5 + … + 5  (269 बार)

अर्थात “पाँच” का प्रतीक 269 बार लिखना पड़ेगा। 5 के समूहन ने मिलान पद्धति के 1345 चिह्नों को घटाकर 269 कर दिया — बचत तो हुई, पर पर्याप्त नहीं। इसे लिखना, पढ़ना और दो ऐसे संख्यांकों की तुलना करना — तीनों व्यवहार में असंभव हैं।

उपाय बड़ा समूह आकार नहीं, बल्कि समूह आकारों का एक अनुक्रम है, जिसमें प्रत्येक पिछले का 5 गुना हो:

1 → 5 → 25 → 125 → 625 → 3125
1345 = (2 × 625) + (0 × 125) + (3 × 25) + (4 × 5) + (0 × 1)
      = 1250 + 0 + 75 + 20 + 0 = 1345
आधार-5 संख्यांक: 20340

अब वही संख्या चित्र-रूप में केवल 9 प्रतीक माँगती है (∿∿ ⬡⬡⬡ □□□□), 269 नहीं।

ऐसा क्यों होता है: एक ही समूह आकार से संख्यांक की लंबाई संख्या के अनुपात में बढ़ती है — संख्या दुगुनी कीजिए, लिखाई भी दुगुनी। परंतु जब सांकेतिक संख्याएँ 5 की घातें हों तो प्रत्येक नया प्रतीक परास को 5 गुना कर देता है, अत: लंबाई केवल आवश्यक घातों की संख्या जितनी तेजी से बढ़ती है। आधार रखने का सारा लाभ यही है।
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