प्र1.
निम्नलिखित संख्याओं को रोमन पद्धति में दर्शाइए। (i) 1222 (ii) 2999 (iii) 302 (iv) 715
उत्तर
पुस्तक का ही नियम लीजिए: पहले यथासंभव 1000, फिर यथासंभव 500, फिर 100, 50, 10, 5 और अंत में 1।
(i) 1222 = 1000 + 100 + 100 + 10 + 10 + 1 + 1
= MCCXXII
= MCCXXII
(ii) 2999 = 1000 + 1000 + 900 + 90 + 9
= MM + CM + XC + IX = MMCMXCIX
= MM + CM + XC + IX = MMCMXCIX
(iii) 302 = 100 + 100 + 100 + 1 + 1
= CCCII
= CCCII
(iv) 715 = 500 + 100 + 100 + 10 + 5
= DCCXV
= DCCXV
पढ़कर जाँचिए: MCCXXII = 1000 + 200 + 20 + 2 = 1222 ✓ MMCMXCIX = 2000 + 900 + 90 + 9 = 2999 ✓ CCCII = 300 + 2 = 302 ✓ DCCXV = 500 + 200 + 15 = 715 ✓
ऐसा क्यों होता है: 2999 रोचक है। केवल समूहन के नियम से 900 = DCCCC, 90 = LXXXX और 9 = VIIII मिलता, अर्थात MMDCCCCLXXXXVIIII — 17 प्रतीक। “एक कम” वाली विधि (4 के लिए IV, 40 के लिए XL) से CM, XC, IX मिलते हैं और केवल 8 प्रतीक लगते हैं। पुस्तक स्वयं कहती है कि इस पद्धति का प्रयोग करने वाले सदैव एक-सा अनुसरण नहीं करते थे, अत: प्राचीन शिलालेखों में दोनों रूप मिलते हैं; आज छोटा रूप प्रचलित है।
संकेत: कोई प्रतीक अपने से बड़े प्रतीक के पहले हो तो घटाया जाता है (IX = 10 − 1) और बाद में हो तो जोड़ा जाता है (XI = 10 + 1)। रोमन संख्यांक बाएँ से दाएँ पढ़िए और देखिए कि कहीं कोई छोटा अक्षर किसी बड़े के आगे तो नहीं खड़ा।