गणित प्रकाश अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब इसे स्वयं कीजिए। (ख) LXXXVII + LXXVIII
उत्तर

दोनों संख्यांकों के प्रतीकों को एक साथ रखिए, फिर सबसे छोटे से आरंभ करके पुन: समूहन कीजिए — यह ध्यान रखते हुए कि रोमन विनिमय दरें सब जगह एक-सी नहीं हैं।

LXXXVII = L + X + X + X + V + I + I
LXXVIII  = L + X + X + V + I + I + I

कुल:  L L   X X X X X   V V   I I I I I

अब एक-एक करके विनिमय कीजिए:

विनिमयक्योंकिअब शेष
I I I I I → V5 इकाई मिलकर एक पाँचL L, X X X X X, V V V
V V → X2 पाँच मिलकर एक दसL L, X X X X X X, V
X X X X X → L5 दस मिलकर एक पचासL L L, X, V
L L → C2 पचास मिलकर एक सौC, L, X, V
योग = C + L + X + V = CLXV
जाँच: 87 + 78 = 165 = 100 + 50 + 10 + 5 ✓
ऐसा क्यों होता है: ध्यान दीजिए कि इसमें कितनी सावधानी लगी। I से V जाने पर पाँच का विनिमय; V से X पर दो का; X से L पर पुन: पाँच; L से C पर पुन: दो। मिस्र या हिंदू पद्धति में प्रत्येक विनिमय “इनमें से दस मिलकर उनमें से एक” होता है, अत: वही पुन: समूहन बिना सोचे किया जा सकता है। यही एक अंतर बताता है कि रोमन अंकगणित के लिए अबेकस और प्रशिक्षित व्यक्ति क्यों चाहिए थे।
प्र2.
रोमन संख्यांकों में दी गई दो संख्याओं को हिंदू संख्यांकों में परिवर्तित किए बिना आप कैसे गुणा करेंगे? निम्नलिखित सांकेतिक संख्याओं के युग्मों का गुणनफल ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। V × L, L × D, V × D एवं VII × IX
उत्तर

कोई सामान्य नियम है ही नहीं, क्योंकि रोमन सांकेतिक संख्याएँ किसी एक संख्या की घातें नहीं हैं। प्रत्येक गुणनफल अलग से — बार-बार जोड़कर या वितरण गुणधर्म से — निकालना पड़ता है।

गुणनफलहलरोमन संख्यांक
V × L5 पचास = L+L+L+L+L = 250 = C+C+LCCL
L × D50 पाँच-सौ = 25,000 = 25 हजारMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM (M को 25 बार)
V × D5 पाँच-सौ = 2500 = M + M + DMMD
VII × IXVII × (X − I) = LXX − VII = 70 − 7 = 63 = L + X + IIILXIII
ऐसा क्यों होता है: मिस्र की पद्धति में सांकेतिक × सांकेतिक सदैव एक और सांकेतिक संख्या ही होती है (102 × 103 = 105), अत: दोनों गुणक जानते ही उत्तर लिखा जा सकता है। यहाँ V × L = CCL स्वयं सांकेतिक संख्या ही नहीं है, और L × D = 25,000 का तो कोई प्रतीक ही नहीं — विवश होकर M को पच्चीस बार लिखना पड़ता है। रोमन सांकेतिक संख्याएँ ×5, ×2, ×5, ×2, ×5, ×2 की छलाँग लगाती हैं, अत: न कोई नियम याद रखने योग्य है और न कोई पैटर्न उपयोग करने योग्य।
संकेत: VII × IX को VII × (X − I) के रूप में करना सबसे सरल है। इस पद्धति में छोटा प्रतीक बड़े के आगे पहले से ही घटाव का अर्थ रखता है, अत: यह युक्ति यहाँ बहुत स्वाभाविक है।
प्र3.
CCXXXI और MDCCCLII को गुणा करें
उत्तर

पहले दोनों संख्यांक पढ़िए।

CCXXXI   = 100 + 100 + 10 + 10 + 10 + 1 = 231
MDCCCLII = 1000 + 500 + 300 + 50 + 2 = 1852

दूसरे संख्यांक को उसकी सांकेतिक संख्याओं में तोड़कर वितरण गुणधर्म लगाइए:

231 × 1852 = 231 × (1000 + 800 + 50 + 2)
= 231 × 1000  +  231 × 800  +  231 × 50  +  231 × 2
= 231000 + 184800 + 11550 + 462
= 427812

जाँच: 231000 + 184800 = 415800; 415800 + 11550 = 427350; 427350 + 462 = 427812 ✓

अब 427812 को रोमन संख्यांकों में लिखने का प्रयास कीजिए। सबसे बड़ा रोमन प्रतीक M = 1000 है, अत: 427 M लिखने पड़ेंगे और उसके बाद DCCCXII। बाद के रोमन इसका उपाय संख्यांक के ऊपर एक रेखा खींचकर करते थे, जिसका अर्थ था “1000 गुना”:

427812 = 427 हजार + 812
427 = CDXXVII,   812 = DCCCXII
अत: 427812 = C̄D̄X̄X̄V̄Ī Ī DCCCXII
ऐसा क्यों होता है: कार्टून का व्यंग्य यही है। CCXXXI को MDCCCLII से गुणा करने को कहा जाना सचमुच शेर से लड़ने जितना ही सुखद था — इसलिए नहीं कि गणित कठिन है, बल्कि इसलिए कि संकेतन कोई सहायता नहीं देता। हिंदू संख्यांकों में आप 231 × 1852 को स्तंभों में रखकर एक मिनट में कर लेंगे, क्योंकि प्रत्येक हासिल “इनमें से दस मिलकर उनमें से एक” ही है।
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