प्र1.
क्या कोई ऐसी संख्या हो सकती है जिसके मिस्र संख्यांक निरूपण में कोई एक प्रतीक 10 या उससे अधिक बार आता हो? क्यों नहीं?
उत्तर
नहीं — कम से कम उस व्यवस्थित रूप में नहीं जो मिस्रवासी वास्तव में लिखते थे।
किसी सांकेतिक संख्या 10a की 10 प्रतिकृतियाँ = 10 × 10a = 10a+1
और 10a+1 का अपना अलग प्रतीक होता है।
और 10a+1 का अपना अलग प्रतीक होता है।
अत: दस समान प्रतीकों को सदैव अगले प्रकार के एक प्रतीक से बदल दिया जाता। इसलिए प्रत्येक प्रतीक अधिकतम 9 बार आ सकता है।
ऐसा क्यों होता है: यही तथ्य हमारे अंकों की सीमा भी तय करता है। हिंदू पद्धति का कोई अंक बताता है कि 10 की उस घात के कितने हैं, और यह उत्तर कभी 10 या अधिक नहीं हो सकता — इसीलिए अंक 0 से 9 तक ही चलते हैं, आगे नहीं। 9 पर रुकना मनमाना नहीं है; वह आधार से ठीक एक कम है।
संकेत: एक स्थान पर यह तर्क टूटता है। सबसे ऊपर का प्रतीक सूर्य है, 107। दस सूर्य 108 होंगे और उसके लिए कोई प्रतीक है ही नहीं — अत: दस करोड़ और उससे बड़ी संख्याओं के लिए सूर्य को सचमुच दस या अधिक बार बनाना पड़ेगा। इसी अनुभाग की सीमा यही है।