प्र1.
संख्या 143 को इस नई संख्या पद्धति में व्यक्त कीजिए।
उत्तर
143 से छोटी सबसे बड़ी सांकेतिक संख्या से आरंभ कीजिए। वह 53 = 125 है, क्योंकि अगली, 625, बहुत बड़ी है।
143 − 125 = 18
18 = 5 + 5 + 5 + 3 (तीन 5, फिर 3 इकाई)
अत: 143 = 125 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1
18 = 5 + 5 + 5 + 3 (तीन 5, फिर 3 इकाई)
अत: 143 = 125 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1
संख्यांक: ○ □□□ △△△
जाँच: 125 + 15 + 3 = 143 ✓
जाँच: 125 + 15 + 3 = 143 ✓
आधार-5 के अंकों में यही संख्या इस प्रकार है:
143 = (1)×125 + (0)×25 + (3)×5 + (3)×1 = आधार 5 में 1033
ऐसा क्यों होता है: षट्भुज ⬡ (25) यहाँ आया ही नहीं, क्योंकि 125 निकालने के बाद केवल 18 बचता है और 18 < 25। चित्र-रूप में उसकी अनुपस्थिति का अर्थ केवल इतना है कि वह प्रतीक नहीं बनाया गया; परंतु अंक-रूप में वही अनुपस्थिति 0 लिखकर दिखानी पड़ती है। यही एक अंतर मिस्र की अवधारणा और स्थानीय मान के बीच है।
स्वयं जाँचिए: यहाँ कोई प्रतीक पाँच या अधिक बार नहीं आया। यदि कभी ऐसा हो तो उनमें से पाँच को अगले प्रतीक के एक से बदल दिया जाएगा — इसीलिए आधार-5 का प्रत्येक अंक 0 से 4 के बीच रहता है।