प्र1.
संख्या 60 के निरूपण का अवलोकन कीजिए। संख्या 3600 का निरूपण क्या होगा?
उत्तर
पुन: एक अकेली कील Y — इस बार 3600 के स्थान पर, जिसके दाईं ओर दो रिक्त स्थान हैं।
| संख्या | 3600 का स्थान | 60 का स्थान | इकाई का स्थान | वास्तव में क्या लिखा जाता है |
|---|---|---|---|---|
| 1 | — | — | Y | Y |
| 60 | — | Y | (रिक्त) | Y |
| 3600 | Y | (रिक्त) | (रिक्त) | Y |
पट्टिका पर तीनों एक जैसे ही दिखते हैं। केवल प्रसंग से ही पढ़ने वाला जान सकता था कि कौन-सी संख्या अभीष्ट है।
ऐसा क्यों होता है: स्थानीय मान पद्धति में अर्थ स्थान से आता है — परंतु रिक्त स्थान पर स्याही नहीं होती, और संख्यांक के अंत में पड़ा रिक्त स्थान तो दिखाई भी नहीं देता। बाद के मेसोपोटामिया वासियों ने संख्यांक के बीच की रिक्ति के लिए एक स्थानधारक चिह्न बनाया, जो अद्भुत विचार है और हमारे 0 के बहुत निकट। परंतु उन्होंने इसका प्रयोग अंत में नहीं किया, अत: 1, 60 और 3600 की अस्पष्टता बनी रही। हिंदू पद्धति ने 0 को अन्य अंकों जैसा ही अंक मानकर यह अस्पष्टता पूर्णत: समाप्त कर दी।
स्वयं जाँचिए: उसी पृष्ठ पर 12, 602 और 36002 — तीनों < YY के रूप में लिखे दिखते हैं, और उन्हें अलग करने वाला केवल अंतराल है। हमारी पद्धति में ये तीन स्पष्टत: भिन्न संख्यांक हैं, क्योंकि प्रत्येक रिक्त स्थान 0 से भर दिया जाता है।