तारा (★) दो विकल्पों पर लगेगा — संवेदनहीनता से और कठोरता से।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| सामाजिकता से | ग़लत | सामाजिकता एक गुण है। पत्थर बनना कोई गुण नहीं, कमी है। कवि यहाँ निंदा कर रहा है, प्रशंसा नहीं। |
| संवेदनहीनता से | सही ★ | पत्थर में कोई भाव, कोई अनुभूति नहीं होती। कवि स्वयं कहता है — “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं” — यानी भावशून्य होना ही पत्थर होना है। |
| कठोरता से | सही ★ | पत्थर की दूसरी पहचान है उसका कड़ापन — वह पिघलता नहीं, पसीजता नहीं। कविता में आगे यही कहा गया है — “उस पर है नहीं पसीजा जो”। |
| नैतिकता से | ग़लत | नैतिकता भी एक गुण है। जिस हृदय को कवि पत्थर कह रहा है, उसमें गुण नहीं, अभाव है। |