मल्हार अध्याय 1 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है— • सामाजिकता से • संवेदनहीनता से • कठोरता से • नैतिकता से
उत्तर

तारा (★) दो विकल्पों पर लगेगा — संवेदनहीनता से और कठोरता से

विकल्पसही / ग़लतकारण
सामाजिकता सेग़लतसामाजिकता एक गुण है। पत्थर बनना कोई गुण नहीं, कमी है। कवि यहाँ निंदा कर रहा है, प्रशंसा नहीं।
संवेदनहीनता सेसही ★पत्थर में कोई भाव, कोई अनुभूति नहीं होती। कवि स्वयं कहता है — “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं” — यानी भावशून्य होना ही पत्थर होना है।
कठोरता सेसही ★पत्थर की दूसरी पहचान है उसका कड़ापन — वह पिघलता नहीं, पसीजता नहीं। कविता में आगे यही कहा गया है — “उस पर है नहीं पसीजा जो”
नैतिकता सेग़लतनैतिकता भी एक गुण है। जिस हृदय को कवि पत्थर कह रहा है, उसमें गुण नहीं, अभाव है।
क्यों दो उत्तर: ‘पत्थर’ एक रूपक है और रूपक एक साथ एक से अधिक गुण उधार देता है। पत्थर महसूस नहीं करता — इससे संवेदनहीनता आई; पत्थर पिघलता नहीं — इससे कठोरता आई। इसीलिए प्रश्न में कहा गया है कि कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्र2.
2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है? • देश की प्रगति • देश के प्रति प्रेम • देश की सुरक्षा • देश की स्वतंत्रता
उत्तर

मुख्य भाव है — देश के प्रति प्रेम। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

कैसे तय करें: कविता का मुख्य भाव वह होता है जो पूरी कविता में बार-बार लौटे, केवल एक जगह आकर चला न जाए। यहाँ टेक — “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” — तीन बार आती है। कविता का शीर्षक भी ‘स्वदेश’ है।
  • देश की प्रगति — कविता में आई ज़रूर है (“जिसने कि खजाने खोले हैं”), पर वह प्रेम जगाने का साधन है, विषय नहीं।
  • देश की सुरक्षा — केवल एक जगह संकेत मिलता है (“क्या तोप नहीं तलवार नहीं”), और वहाँ भी कवि हथियार की नहीं, अपने हाथों की बात कर रहा है।
  • देश की स्वतंत्रता — कविता स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों की है, इसलिए उसकी छाया तो है, पर कवि ने कहीं ‘स्वतंत्रता’ शब्द तक नहीं लिखा। वह देश-प्रेम जगाना चाहता है, स्वतंत्रता उसका परिणाम है।
प्र3.
3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है? • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए • देश की शासन व्यवस्था के लिए • देश के समस्त नागरिकों के लिए • देश के सभी प्राणियों के लिए
उत्तर

‘हम’ आया है — देश के समस्त नागरिकों के लिए। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

पंक्ति के आस-पास से प्रमाण: इससे ठीक पहले कवि कहता है — “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें…”। जो उगा-बढ़ा है, जिसने दाना-पानी पाया है, जिसके माता-पिता और बंधु इसी देश में हैं — वह देश का नागरिक ही हो सकता है। ‘हम’ में कवि अपने आपको और पढ़ने वाले, दोनों को शामिल कर लेता है।

बाक़ी विकल्प क्यों नहीं: प्राकृतिक संसाधन बोलते नहीं, इसलिए वे ‘हम’ नहीं कह सकते। शासन व्यवस्था के लिए भी नहीं — कवि तो शासन की नहीं, जनता की बात कर रहा है; यही इस पंक्ति की चोट है कि राजा-रानी कोई और नहीं, हम स्वयं हैं। ‘सभी प्राणियों’ वाला उत्तर भावना की दृष्टि से बुरा नहीं, पर कविता का सीधा संदर्भ मनुष्यों का है।

प्र4.
4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है? • जिसमें साहस की कमी है • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
उत्तर

सबसे पक्का उत्तर है — जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है। इस पर तारा (★) अवश्य लगाइए। इसके साथ जिसमें स्नेह का भाव नहीं है पर भी तारा लगाया जा सकता है — कविता में उसका भी आधार मौजूद है।

विकल्पनिर्णयकविता से आधार
जिसमें साहस की कमी हैनहींसाहस छोड़ने वाले के बारे में कवि कहता है — “वह पहुँच सकेगा पार नहीं।” उसे पत्थर नहीं कहा गया।
जिसमें स्नेह का भाव नहीं हैलगाया जा सकता है ★“जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है” — यहाँ टेक सीधे भावहीनता के बाद आई है।
जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं हैसही ★यही कविता की टेक है — “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” तीनों बार यही पंक्ति दोहराई गई है।
जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं हैनहीं“जो जीवित जोश जगा न सका” वाले के लिए कवि कहता है — “उस जीवन में कुछ सार नहीं”, पत्थर नहीं कहता।
ध्यान दीजिए: इस तरह के प्रश्न में उत्तर छाँटने का तरीक़ा यह है कि देखिए — टेक किस बात के तुरंत बाद आई है। कवि ने ‘पत्थर’ शब्द केवल दो जगह जोड़ा है: देश-प्रेम के अभाव से, और भावों के अभाव से।
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

इस गतिविधि में उत्तर बदलना ज़रूरी नहीं है — अपने उत्तर के पीछे का कारण बता पाना ज़रूरी है। चर्चा का तरीक़ा यह रखिए:

  1. हर साथी अपना चुना हुआ विकल्प पढ़े और कविता की वह पंक्ति भी पढ़े जिसके कारण उसने वह विकल्प चुना। बिना पंक्ति के दिया गया कारण नहीं गिना जाएगा।
  2. जिन प्रश्नों में एक से अधिक उत्तर संभव हैं (जैसे प्रश्न 1 और 4), वहाँ सबके उत्तर मिलाकर देखिए — प्रायः सब मिलकर पूरा अर्थ बनाते हैं।
  3. अंत में तय कीजिए कि किस उत्तर के पक्ष में सबसे सीधा प्रमाण है, और किसके पक्ष में केवल अनुमान।
नमूना उत्तर: “मैंने प्रश्न 1 में ‘संवेदनहीनता’ और ‘कठोरता’ दोनों चुने, क्योंकि पत्थर की दोनों पहचानें कविता में अलग-अलग जगह आई हैं — भावों का अभाव और न पसीजना। मेरे मित्र ने केवल ‘कठोरता’ चुना था; पर ‘उस पर है नहीं पसीजा जो’ पंक्ति सुनकर उसने माना कि दोनों ठीक हैं। प्रश्न 4 में हम दोनों का उत्तर एक ही था, क्योंकि टेक कविता में तीन बार आई है और वह देश-प्रेम की ही बात करती है।”
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