मल्हार अध्याय 1 मिलकर करें मिलान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए। स्तंभ 1 — 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। स्तंभ 2 — 1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
उत्तर

सही मिलान — 1 → 3, 2 → 4, 3 → 1, 4 → 2

क्रमस्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2मिलान क्यों
1.जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
3‘पार पहुँचना’ का अर्थ है लक्ष्य तक पहुँचना। साहस छूटा तो यात्रा बीच में ही रुक गई — स्तंभ 2 का तीसरा कथन ठीक यही कहता है।
2.जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।
4‘जोश जगाना’ किसी और के भीतर जगाया जाता है। जो अपने साथ दूसरों में भी उत्साह न भर सके, उसका जीवन ‘सार’ से ख़ाली — यानी निष्फल और अर्थहीन है।
3.जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।
1‘ज्ञानी मरते हैं’ यानी विद्वान भी इस पर मुग्ध हैं — बात देश की ज्ञान-संपदा की हो रही है, जिससे पूरा विश्व प्रभावित है।
4.सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
2कवि पूछता है — क्या हमारे हाथ ही तोप-तलवार नहीं हैं? यानी जैसे युद्ध में हथियार चाहिए, वैसे ही जीवन की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति चाहिए।
मिलान करने का तरीक़ा: पहले हर पंक्ति में से एक कुंजी-शब्द पकड़िए — ‘साहस’, ‘जोश जगाना’, ‘ज्ञानी’, ‘तोप-तलवार’। फिर स्तंभ 2 में वही शब्द या उसका पर्याय ढूँढ़िए। चारों में यह शब्द ज्यों का त्यों मिल जाता है, इसलिए यह मिलान बिना उलझन के हो जाता है।
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