प्र1.
कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥”
उत्तर
भावार्थ — यह बिलकुल तय है, इसमें रत्ती भर संदेह नहीं, कि एक दिन प्राण जाने ही हैं। समय का दीपक निरंतर जलता रहता है और परवाने का भाग्य यही है कि वह उस दीपक पर जलकर मिट जाए।
कवि यहाँ किस बात पर चोट कर रहा है: देश के लिए कुछ न करने का सबसे बड़ा बहाना है — डर। कवि उसी बहाने की जड़ काट देता है। वह कहता है कि मृत्यु तो आनी ही है, वह किसी के बचने से टलती नहीं। तो फिर डरकर बचा हुआ जीवन भी अंत में जाएगा ही। जब जाना निश्चित है, तो जीवन को किसी बड़े काम में लगा देना ही समझदारी है।
भाषा और अलंकार —
- रूपक — ‘काल-दीप’ में काल पर दीपक का आरोप है, और मनुष्य पर ‘परवाने’ का। परवाना दीपक की ओर खिंचा चला जाता है, यह जानते हुए भी कि वहाँ जल जाना है — देशभक्त का चरित्र ठीक ऐसा ही है।
- अनुप्रास और पुनरुक्ति — “निश्चित है निस्संशय निश्चित” में ‘नि’ ध्वनि तीन बार आई है और ‘निश्चित’ शब्द दो बार। इससे बात पर हथौड़े जैसी चोट पड़ती है — कवि कह रहा है कि इस पर बहस की गुंजाइश ही नहीं।
- पदक्रम — ‘है’ पंक्ति के आरंभ में रखा गया है (“है जान…”, “है काल-दीप…”), जिससे गद्य जैसी सपाटता हटकर गीत जैसी लय आ जाती है।