प्र1.
उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर
चर्चा से पहले पत्र को एक बार फिर देख लीजिए, क्योंकि उसी में चर्चा के बिंदु छिपे हैं। यह पत्र नेताजी ने मांडले जेल से दक्षिण कलकत्ता सेवक-समिति के उप-मंत्री श्री अनिलचंद्र विश्वास को लिखा था। इसमें वे दो काम सुझाते हैं — मिट्टी के खिलौने बनाना और सीप के बटन तैयार करना।
पत्र में गृह-उद्योग की चार शर्तें छिपी हैं — चर्चा में इन्हीं को कसौटी बनाइए:
1. कम पूँजी — ‘खर्च कुछ भी नहीं लगेगा… मात्र रंगों के लिए कुछ नकद रुपये खर्च होंगे।’
2. जल्दी सीखा जा सके — ‘कोई भी कुछ दिनों में ही यह काम सीख सकता है।’
3. फुरसत के समय में हो सके — ‘रसोई के समय में से बचे खाली समय में भी, स्त्रियाँ यह काम करती रहती हैं।’
4. बाज़ार की व्यवस्था — ‘समिति सिर्फ सस्ते दामों में रॉ मैटीरियल आदि जुटा देगी और तैयार वस्तुओं को अधिक दामों में बेचने की व्यवस्था करेगी।’ नेताजी जानते थे कि कारीगर का असली संकट बनाना नहीं, बेचना है।
1. कम पूँजी — ‘खर्च कुछ भी नहीं लगेगा… मात्र रंगों के लिए कुछ नकद रुपये खर्च होंगे।’
2. जल्दी सीखा जा सके — ‘कोई भी कुछ दिनों में ही यह काम सीख सकता है।’
3. फुरसत के समय में हो सके — ‘रसोई के समय में से बचे खाली समय में भी, स्त्रियाँ यह काम करती रहती हैं।’
4. बाज़ार की व्यवस्था — ‘समिति सिर्फ सस्ते दामों में रॉ मैटीरियल आदि जुटा देगी और तैयार वस्तुओं को अधिक दामों में बेचने की व्यवस्था करेगी।’ नेताजी जानते थे कि कारीगर का असली संकट बनाना नहीं, बेचना है।
चर्चा कैसे कीजिए —
- अपने मोहल्ले या गाँव के गृह-उद्योग गिनाइए — अचार-पापड़ बनाना, अगरबत्ती, मोमबत्ती, मिट्टी के बरतन और दीये, टोकरी और चटाई बुनना, कढ़ाई और सिलाई, बाँस का काम, साबुन, कागज़ के लिफ़ाफ़े, मधुमक्खी-पालन।
- हर उद्योग को ऊपर की चारों शर्तों पर परखिए — कितनी पूँजी, कितने दिन में सीखा जाए, कौन कर सकता है, माल कहाँ बिकता है।
- पता कीजिए कि आज इनकी मदद के लिए क्या है — स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ, कारीगर मेले और सरकारी ऋण-योजनाएँ। ये नेताजी की ‘समिति’ का ही आज का रूप हैं।
- अंत में तय कीजिए कि आपकी कक्षा कोई एक छोटा उत्पाद स्वयं बनाकर विद्यालय के मेले में लगा सकती है या नहीं।
पाठ से जोड़िए: भाषण में नेताजी ने कहा था — ‘जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी।’ यह पत्र उसी वाक्य का व्यावहारिक रूप है। ध्यान दीजिए कि जेल में बंद रहते हुए भी वे बटन बनाने के औज़ार तक की बात कर रहे हैं — बड़ा स्वप्न देखने वाला व्यक्ति छोटी बात को छोटा नहीं समझता।