कक्षा ८ हिंदी अध्याय 10 तरुण के स्वप्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ की विधा गद्य है — यह एक भाषण/उद्‌बोधन का अंश है, किसी कहानी या निबंध का नहीं। इसलिए इसमें सीधा संबोधन है (‘हे मेरे तरुण भाइयो!’), लंबे-लंबे वाक्य हैं और अंत में एक आह्वान है। नेताजी अपना स्वप्न देशबंधु चित्तरंजन दास से जोड़ते हैं — ‘वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।’ फिर कहते हैं, ‘उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।’ उस आदर्श समाज की पाँच शर्तें पाठ में गिनाई गई हैं — व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद का स्थान न हो, नारी को पुरुषों के समान अधिकार हों, अर्थ की विषमता न हो, और हर व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति का समान सुअवसर मिले। इन शर्तों के साथ एक शर्त कर्म की है — ‘जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा, वह राष्ट्र किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा।’ नेताजी की दृष्टि केवल भ

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थपाठ की पंक्ति मेंध्यान देने की बात
उत्ससोता, स्रोत, जहाँ से पानी फूटता है‘वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना’शक्ति को पानी बना दिया गया है, इसलिए उसका ‘स्रोत’ हो सकता है
निर्झरझरना, प्रपात‘और उनके आनंद का निर्झर रहा’उत्स से निकलकर झरना बनना — एक ही चित्र आगे बढ़ता है
सर्वांगीणसब अंगों में व्याप्त, हर दृष्टि से पूरा‘एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज’स्वाधीनता केवल राजनीतिक नहीं, सामाजिक और आर्थिक भी
विषमताअसमानता, ऊँच-नीच‘उस समाज में अर्थ की विषमता न हो’विपरीतार्थक — समानता
उत्तराधिकारीकिसी के बाद उसकी संपत्ति पाने का हकदार, वारिस‘उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं’स्वप्न को संपत्ति की तरह देखा गया है — मिलती है तो सँभालनी भी पड़ती है
अकर्मण्यकर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा‘आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा’विपरीतार्थक — कर्मण्य / कर्मठ
मर्यादासीमा, सदाचार, प्रतिष्ठा‘श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी’यहाँ अर्थ ‘प्रतिष्ठा’ है — मेहनत को सम्मान मिलेगा
विजातीयभिन्न जाति का, दूसरी जाति या वर्ग का‘किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा’बाहर से थोपा गया प्रभाव, जो अपने समाज का अपना नहीं
गण्यगिनने लायक, मान्य, लिहाज करने योग्य‘आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा’दुनिया उसे गिनेगी, यानी उसका उदाहरण देगी
क्षुद्रछोटा, तुच्छ‘जो मेरे क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है’अपने लिए ‘क्षुद्र’ कहना नेताजी की विनम्रता है; विपरीतार्थक — विशाल/विराट
प्रतिष्ठास्थापना, प्रतिष्ठित करना‘इस सत्य की प्रतिष्ठा के लिए सबकुछ किया जा सकता है’यहाँ ‘इज़्ज़त’ नहीं, ‘स्थापित करना’ अर्थ है
अखंडजिसका सिलसिला न टूटे, अटूट, संपूर्ण‘यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य एवं अखंड सत्य है’भाषा की बात वाले शब्द-समूह का पहला जोड़ा — अखंड सत्य
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. शीर्षक
  7. भाषा की बात
  8. विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
  9. आपकी बात
  10. मिलान कीजिए
  11. सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
  12. स्त्री सशक्तीकरण
  13. आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी
  14. “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”
  15. परियोजना कार्य
  16. साझी समझ
  17. खोजबीन के लिए
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