मल्हार अध्याय 10 मिलान कीजिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं। स्तंभ 1 — 1. 8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं। 2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। 3. जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के तिरसठवें दिन जेल में इनका देहांत हो गया। 4. इनके जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है। 5. नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है। 6. 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश ने इनसे पिता का नाम पूछा तो इन्होंने कहा— “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।” स्तंभ 2 — 1. सरदार वल्लभभाई पटेल 2. महात्मा गाँधी 3. चंद्रशेखर आजाद 4. चित्तरंजन दास 5. जतिन दास 6. भगत सिंह
उत्तर
स्तंभ 1स्वतंत्रता सेनानीथोड़ा और
1. सेंट्रल असेंबली में बम, ‘शहीद-ए-आज़म’6. भगत सिंह8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ असेंबली में बम फेंका। उद्देश्य किसी को मारना नहीं था — वे स्वयं वहीं ठहरे रहे ताकि अदालत उनकी बात सुने। ‘शहीद-ए-आज़म’ का अर्थ है ‘सबसे बड़ा शहीद’।
2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापक, बोस के राजनीतिक गुरु4. चित्तरंजन दासदेशबंधु चित्तरंजन दास ने मोतीलाल नेहरू के साथ 1923 में स्वराज पार्टी की स्थापना की।
3. 13 जुलाई 1929 की भूख हड़ताल, तिरसठवें दिन देहांत5. जतिन दासलाहौर षड्यंत्र मुक़दमे के बंदियों के साथ जेल में सम्मानजनक व्यवहार की माँग को लेकर अनशन; 63 दिन बाद, 13 सितंबर 1929 को उनका निधन हुआ।
4. जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’2. महात्मा गाँधी2 अक्तूबर उनका जन्मदिन है; संयुक्त राष्ट्र इसी दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है।
5. नर्मदा तट पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’1. सरदार वल्लभभाई पटेलगुजरात में नर्मदा नदी के तट पर स्थित यह प्रतिमा उन्हें ‘एकता’ का प्रतीक मानकर बनाई गई, क्योंकि उन्होंने रियासतों को भारत में मिलाने का काम किया।
6. “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता…”3. चंद्रशेखर आजादतब उनकी आयु लगभग पंद्रह वर्ष थी। इसी उत्तर के बाद उनके नाम के साथ ‘आजाद’ जुड़ गया।

संक्षेप में — 1 → 6, 2 → 4, 3 → 5, 4 → 2, 5 → 1, 6 → 3.

सूत्र पकड़िए: ऐसे प्रश्न में हर तथ्य के भीतर एक पहचान-चिह्न छिपा होता है — कोई उपाधि (‘शहीद-ए-आज़म’), कोई तारीख़ (13 जुलाई 1929), कोई स्थान (नर्मदा तट) या कोई वाक्य (‘मेरा नाम आजाद है’)। पहले वही चिह्न ढूँढ़िए, नाम अपने आप मिल जाएगा।
प्र2.
(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
उत्तर

चित्तरंजन दास।

“हमारे नेता स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास ने भी एक स्वप्न देखा था। वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा। उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।”

पाठ के आरंभ में ही नेताजी उनका नाम लेते हैं। मिलान वाली तालिका में भी उनका परिचय है — ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक और सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु

यह नाम पाठ के आरंभ में ही क्यों आता है: नेताजी अपना स्वप्न अपनी खोज बताकर शुरू नहीं करते। वे पहले बताते हैं कि यह स्वप्न उन्हें कहाँ से मिला, फिर स्वयं को उसका ‘उत्तराधिकारी’ कहते हैं, और अंत में उसे तरुणों को सौंप देते हैं। इस तरह पूरा भाषण एक शृंखला बन जाता है — गुरु से शिष्य तक, और शिष्य से अगली पीढ़ी तक।
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