प्र1.
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
उत्तर
यह आपका अपना उत्तर होगा। अच्छा उत्तर लिखने के लिए नेताजी की ही विधि अपनाइए — पहले बताइए कि आज क्या कमी दिखती है, फिर बताइए कि आदर्श स्थिति कैसी होगी, और अंत में एक बात ऐसी जोड़िए जो आप स्वयं कर सकते हैं। तीनों स्तरों — विद्यालय, राज्य, देश — के लिए दो-तीन वाक्य पर्याप्त हैं।
नमूना उत्तर:
विद्यालय — मैं ऐसे विद्यालय का स्वप्न देखता हूँ जहाँ किसी विद्यार्थी को उसकी जाति, भाषा या घर की स्थिति के कारण अलग न समझा जाए; जहाँ पुस्तकालय और खेल का मैदान सबके लिए खुला हो; और जहाँ जो पीछे रह गया हो, उसे बाकी बच्चे साथ लेकर चलें। मैं अपनी ओर से यह कर सकता हूँ कि गणित में कमज़ोर अपने साथी के साथ रोज़ आधा घंटा बैठूँ।
राज्य — मैं चाहता हूँ कि मेरे राज्य के हर गाँव तक अच्छा विद्यालय, चिकित्सालय और सड़क पहुँचे, और यहाँ के कारीगरों को अपना सामान बेचने के लिए बड़ा बाज़ार मिले, ताकि काम की तलाश में लोगों को घर न छोड़ना पड़े।
देश — मैं ऐसे भारत का स्वप्न देखता हूँ जो अपनी ज़रूरत की चीज़ें स्वयं बनाए, जहाँ स्त्री और पुरुष को हर क्षेत्र में समान अवसर हो, और जिसे दुनिया — नेताजी के शब्दों में — ‘आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य’ माने।
विद्यालय — मैं ऐसे विद्यालय का स्वप्न देखता हूँ जहाँ किसी विद्यार्थी को उसकी जाति, भाषा या घर की स्थिति के कारण अलग न समझा जाए; जहाँ पुस्तकालय और खेल का मैदान सबके लिए खुला हो; और जहाँ जो पीछे रह गया हो, उसे बाकी बच्चे साथ लेकर चलें। मैं अपनी ओर से यह कर सकता हूँ कि गणित में कमज़ोर अपने साथी के साथ रोज़ आधा घंटा बैठूँ।
राज्य — मैं चाहता हूँ कि मेरे राज्य के हर गाँव तक अच्छा विद्यालय, चिकित्सालय और सड़क पहुँचे, और यहाँ के कारीगरों को अपना सामान बेचने के लिए बड़ा बाज़ार मिले, ताकि काम की तलाश में लोगों को घर न छोड़ना पड़े।
देश — मैं ऐसे भारत का स्वप्न देखता हूँ जो अपनी ज़रूरत की चीज़ें स्वयं बनाए, जहाँ स्त्री और पुरुष को हर क्षेत्र में समान अवसर हो, और जिसे दुनिया — नेताजी के शब्दों में — ‘आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य’ माने।
ध्यान रखिए: स्वप्न लिखते समय केवल इच्छा मत लिखिए (‘सब सुखी हों’), एक ठोस चित्र बनाइए — कौन क्या कर रहा होगा, क्या बदला हुआ दिखेगा। नेताजी ने भी यही किया था; उन्होंने ‘अच्छा समाज’ कहकर छोड़ नहीं दिया, एक-एक शर्त गिनाई।