प्र1.
(क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए—
स्तंभ 1 — 1. स्वीकार 2. सार्थक 3. विषमता 4. क्षुद्र 5. संपन्न 6. अकर्मण्य 7. मरण
स्तंभ 2 — कर्मण्य/कर्मठ, विपन्न, अस्वीकार, जीवन, निरर्थक, समानता, विशाल/वृहत/विराट/महान
उत्तर
| क्रम | स्तंभ 1 | विपरीतार्थक (स्तंभ 2) | पहचान का सूत्र |
|---|---|---|---|
| 1. | स्वीकार | अस्वीकार | ‘अ’ उपसर्ग जोड़ने से अर्थ उलट गया |
| 2. | सार्थक | निरर्थक | सार्थक = अर्थ सहित; निरर्थक = अर्थ रहित (‘निर्’ उपसर्ग) |
| 3. | विषमता | समानता | विषम = असमान, सम = बराबर |
| 4. | क्षुद्र | विशाल / वृहत / विराट / महान | क्षुद्र = छोटा, तुच्छ — इसलिए विपरीत में सब ‘बड़े’ अर्थ वाले शब्द |
| 5. | संपन्न | विपन्न | संपन्न = साधन-संपन्न, धनी; विपन्न = विपत्ति में पड़ा, निर्धन |
| 6. | अकर्मण्य | कर्मण्य / कर्मठ | यहाँ ‘अ’ हटाने से अर्थ उलट जाता है |
| 7. | मरण | जीवन | सीधा विलोम — कोई उपसर्ग नहीं, अलग शब्द |
ध्यान दीजिए — सातों शब्द इसी पाठ से आए हैं: ‘स्वीकार करो’, ‘आदर्श को सार्थक बनाकर’, ‘अर्थ की विषमता’, ‘मेरे क्षुद्र जीवन’, ‘संपन्न समाज’, ‘आलसी तथा अकर्मण्य’, ‘वह मरण है स्वर्ग समान’। इसीलिए विपरीतार्थक शब्द रटने की चीज़ नहीं — जिस पाठ में शब्द मिला हो, वहीं उसका अर्थ भी पकड़ में आता है।
सूत्र: हिंदी में विपरीत अर्थ तीन तरह से बनता है — (1) उपसर्ग जोड़कर: स्वीकार → अस्वीकार, (2) उपसर्ग बदलकर: संपन्न → विपन्न, सार्थक → निरर्थक, (3) बिलकुल अलग शब्द से: मरण → जीवन।