प्र1.
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए— (शब्द समूह में दिए गए शब्द — सत्य, समाज, राष्ट्र, जीवन, शक्ति, आनंद; उदाहरण के रूप में ‘अखंड — सत्य’ भरा हुआ है।)
उत्तर
पुस्तक में पहला जोड़ा भरा हुआ है — अखंड → सत्य। बाकी पाँच शब्दों की विशेषताएँ भी भाषण में ही मिल जाती हैं। पूरा शब्द-समूह इस प्रकार बनेगा —
| विशेषता बताने वाला शब्द | शब्द | भाषण की पंक्ति |
|---|---|---|
| अखंड (नित्य) | सत्य | “यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य एवं अखंड सत्य है।” |
| सर्वांगीण / स्वाधीन / संपन्न | समाज | “हम चाहते हैं, एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज…” |
| स्वाधीन (आदर्श) | राष्ट्र | “…और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र।” / “आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा।” |
| क्षुद्र | जीवन | “जो मेरे क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है।” |
| असीम | शक्ति | “जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है।” |
| अपार | आनंद | “जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है।” |
व्याकरण की बात: जो शब्द किसी संज्ञा की विशेषता या गुण बताता है, वह विशेषण कहलाता है और जिसकी विशेषता बताई जाती है वह विशेष्य। यहाँ बाईं ओर के सब शब्द विशेषण हैं और दाईं ओर के विशेष्य। ध्यान दीजिए कि नेताजी का कोई विशेषण सजावट के लिए नहीं है — ‘असीम’ और ‘अपार’ दोनों का अर्थ ‘जिसकी सीमा न हो’ है, और वे ठीक उस जगह आए हैं जहाँ यह बताना था कि स्वप्न से मिलने वाली शक्ति कभी चुकती नहीं।