मल्हार अध्याय 10 भाषा की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए— (शब्द समूह में दिए गए शब्द — सत्य, समाज, राष्ट्र, जीवन, शक्ति, आनंद; उदाहरण के रूप में ‘अखंड — सत्य’ भरा हुआ है।)
उत्तर

पुस्तक में पहला जोड़ा भरा हुआ है — अखंड → सत्य। बाकी पाँच शब्दों की विशेषताएँ भी भाषण में ही मिल जाती हैं। पूरा शब्द-समूह इस प्रकार बनेगा —

विशेषता बताने वाला शब्दशब्दभाषण की पंक्ति
अखंड (नित्य)सत्य“यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य एवं अखंड सत्य है।”
सर्वांगीण / स्वाधीन / संपन्नसमाज“हम चाहते हैं, एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज…”
स्वाधीन (आदर्श)राष्ट्र“…और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र।” / “आदर्श-राष्ट्र के रूप में गण्य होगा।”
क्षुद्रजीवन“जो मेरे क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है।”
असीमशक्ति“जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है।”
अपारआनंद“जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है।”
व्याकरण की बात: जो शब्द किसी संज्ञा की विशेषता या गुण बताता है, वह विशेषण कहलाता है और जिसकी विशेषता बताई जाती है वह विशेष्य। यहाँ बाईं ओर के सब शब्द विशेषण हैं और दाईं ओर के विशेष्य। ध्यान दीजिए कि नेताजी का कोई विशेषण सजावट के लिए नहीं है — ‘असीम’ और ‘अपार’ दोनों का अर्थ ‘जिसकी सीमा न हो’ है, और वे ठीक उस जगह आए हैं जहाँ यह बताना था कि स्वप्न से मिलने वाली शक्ति कभी चुकती नहीं।
प्र2.
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
उत्तर

इस प्रश्न में अपनी पसंद का विशेषण चुनना है, पर हर चुनाव के साथ कारण देना ज़रूरी है — यही प्रश्न का ‘क्यों’ माँग रहा है।

शब्दमेरा विशेषणकारण
सत्यकड़वा सत्यसच अक्सर सुनने में अच्छा नहीं लगता, फिर भी कहना पड़ता है।
समाजसमरस समाजजिसमें सब घुल-मिलकर रहें — यही नेताजी की ‘जातिभेद न हो’ वाली शर्त का दूसरा नाम है।
राष्ट्रआत्मनिर्भर राष्ट्र‘लेखक से परिचय’ में भी लिखा है कि नेताजी ने आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा था।
जीवनसार्थक जीवननेताजी ने अपने जीवन को ‘क्षुद्र’ कहकर भी उसे स्वप्न से ‘सार्थक’ बना लिया — यही शब्द मुझे अधिक ठीक लगता है।
शक्तिसंगठित शक्तिअकेली शक्ति बिखर जाती है; ‘आजाद हिंद फौज’ इसी संगठित शक्ति का उदाहरण थी।
आनंदनिश्छल आनंदजिस खुशी में कोई छल या स्वार्थ न हो, वही देर तक टिकती है।
करके देखिए: अपने चुने हुए हर जोड़े से एक वाक्य बनाइए, जैसे — ‘संगठित शक्ति के आगे बड़ी से बड़ी कठिनाई भी टिक नहीं पाती।’ विशेषण की परख वाक्य में ही होती है, सूची में नहीं।
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