प्र1.
(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर
यह शीर्षक इसलिए दिया गया होगा क्योंकि पूरे अंश में केवल दो चीज़ें हैं — एक स्वप्न, और वे तरुण जिन्हें वह स्वप्न सौंपा जा रहा है। शीर्षक ने पाठ के दोनों सिरे पकड़ लिए हैं।
शीर्षक की तीन कसौटियाँ, तीनों पर खरा:
1. विषय। ‘स्वप्न’ शब्द इस छोटे-से अंश में बार-बार आता है — देखा गया स्वप्न, उत्तराधिकार में मिला स्वप्न, दिनचर्या चलाने वाला स्वप्न, और अंत में उपहार में दिया गया स्वप्न।
2. श्रोता। भाषण युवक-सम्मेलन में दिया गया और अंत में सीधा पुकारा गया — ‘हे मेरे तरुण भाइयो!’
3. दिशा। शीर्षक ‘नेताजी के स्वप्न’ नहीं, ‘तरुण के स्वप्न’ है। यह छोटा-सा अंतर बड़ी बात कहता है — भाषण के अंत तक वह स्वप्न नेताजी का नहीं रह जाता, सुनने वाले तरुण का हो जाता है। शीर्षक वहीं से लिया गया है जहाँ भाषण पहुँचता है, वहाँ से नहीं जहाँ से शुरू होता है।
1. विषय। ‘स्वप्न’ शब्द इस छोटे-से अंश में बार-बार आता है — देखा गया स्वप्न, उत्तराधिकार में मिला स्वप्न, दिनचर्या चलाने वाला स्वप्न, और अंत में उपहार में दिया गया स्वप्न।
2. श्रोता। भाषण युवक-सम्मेलन में दिया गया और अंत में सीधा पुकारा गया — ‘हे मेरे तरुण भाइयो!’
3. दिशा। शीर्षक ‘नेताजी के स्वप्न’ नहीं, ‘तरुण के स्वप्न’ है। यह छोटा-सा अंतर बड़ी बात कहता है — भाषण के अंत तक वह स्वप्न नेताजी का नहीं रह जाता, सुनने वाले तरुण का हो जाता है। शीर्षक वहीं से लिया गया है जहाँ भाषण पहुँचता है, वहाँ से नहीं जहाँ से शुरू होता है।