भाषण में ‘सब दृष्टियों’ की सूची नेताजी ने स्वयं दे दी है — उसी पंक्ति के बाद वे एक-एक करके बंधन गिनाते हैं। कम-से-कम छह तरह की मुक्ति उसमें से निकलती है —
- सामाजिक मुक्ति — ‘समाज के दबाव से वह मरे नहीं’, यानी रीति-रिवाज और लोकलाज के दबाव में व्यक्ति का दम न घुटे।
- जाति के बंधन से मुक्ति — ‘उस समाज में जातिभेद का स्थान नहीं हो’।
- स्त्री-पुरुष के भेद से मुक्ति — ‘नारी मुक्त होकर… समान अधिकार का उपभोग करे’।
- आर्थिक मुक्ति — ‘उस समाज में अर्थ की विषमता न हो’, यानी गरीबी और असमानता का बंधन न रहे।
- अवसर की मुक्ति — ‘प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा और उन्नति का समान सुअवसर पाए’; अशिक्षा भी एक बंधन है।
- राजनीतिक मुक्ति — ‘वह राष्ट्र किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा’।