प्र1.
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
उत्तर
यहाँ अर्थ का मतलब है धन, और विषमता का मतलब है असमानता। पंक्ति का सीधा अर्थ है — उस समाज में धन का बँटवारा इतना असमान न हो कि कुछ लोगों के पास सब कुछ हो और बहुतों के पास कुछ भी नहीं।
यह शर्त इस भाषण में क्यों आई: नेताजी इससे पहले कह चुके हैं कि उस समाज में ‘व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो’। पर जिस व्यक्ति के पास दो वक्त का भोजन नहीं, वह कागज़ पर स्वतंत्र होकर भी स्वतंत्र नहीं होता — उसकी हर पसंद पेट से तय होती है। इसीलिए नेताजी आर्थिक बराबरी को स्वाधीनता की शर्त बनाते हैं, कोई अलग दान-पुण्य की बात नहीं। ध्यान दीजिए कि अगली ही पंक्ति में वे इसका उपाय भी बता देते हैं — सबको ‘शिक्षा और उन्नति का समान सुअवसर’।
शब्द जोड़िए: ‘विषमता’ का विपरीतार्थक शब्द ‘समानता’ है — यह जोड़ा इसी पाठ के ‘विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग’ अभ्यास में भी आया है।