प्र1.
नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।
स्तंभ 1 — 1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।” 2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” 3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।”
स्तंभ 2 — 1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो। 2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। 3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
उत्तर
| स्तंभ 1 की पंक्ति | सही भाव-विचार | मिलान का आधार |
|---|---|---|
| 1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं…” | स्तंभ 2 — 2 | पंक्ति में उठना-बैठना, चलना-फिरना, लिखना, भाषण देना, काम-काज — यानी पूरे दिन के काम गिनाए गए हैं। इसी को दूसरे स्तंभ में ‘समूची दिनचर्या और आचार-विचार’ कहा गया है। |
| 2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा… भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” | स्तंभ 2 — 3 | ‘स्वदेशी समाज का यंत्र’ का अर्थ है — राष्ट्र अपने ही समाज के लिए काम करने वाली मशीन बने। दूसरे स्तंभ में यही बात योजनाओं की भाषा में है — ‘अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएँ’, और उसका फल — ‘अभाव नहीं होगा’। |
| 3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।” | स्तंभ 2 — 1 | दोनों में दो ही बातें हैं और एक ही क्रम में — पहले पूरी स्वतंत्रता, फिर सामाजिक दबाव का न होना। |
संक्षेप में — 1 → 2, 2 → 3, 3 → 1.
मिलान का तरीका: ऐसे प्रश्न में पूरी पंक्ति का अनुवाद मत ढूँढ़िए, उसका मुख्य शब्द पकड़िए। पहली पंक्ति का मुख्य शब्द है ‘दिनचर्या’, दूसरी का ‘स्वदेशी/अभाव’, तीसरी का ‘दबाव’। यही तीन शब्द दूसरे स्तंभ में भी मिल जाते हैं, और मिलान अपने आप हो जाता है।