कक्षा ८ हिंदी अध्याय 9 आदमी का अनुपात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

कविता एक ही साँचे — ‘क है ख में’ — को दोहराते हुए कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र → नभ गंगा → ब्रह्मांड तक फैलती है। हर चरण अपने से पहले वाले को अपने भीतर समेट लेता है। विशालता यहाँ बताई नहीं जाती, गिनवाई जाती है। पंक्तियाँ छोटी हैं और लगभग हर पंक्ति ‘में’ पर खत्म होती है, इसलिए पढ़ते-पढ़ते पाठक स्वयं एक-एक सीढ़ी ऊपर चढ़ता जाता है। चरम पर पहुँचकर कवि निष्कर्ष रखते हैं — ‘यह है अनुपात / आदमी का विराट से’। यही कविता का शीर्षक भी है और उसका केंद्रीय विचार भी। दूसरा भाग उलटी दिशा में चलता है — इतना छोटा आदमी ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में डूबकर ‘संख्यातीत शंख सी दीवारें’ उठाता है और स्वयं को दूसरे का स्वामी बताता है। अंत कविता को वहीं लौटा लाता है जहाँ से वह चली थी — ‘एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है’। सबसे बड़े विस्तार के बाद सबसे छोटा बँटवारा; यही तीख

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्द / पंक्तिअर्थकविता में संकेतकाव्य-युक्ति
अनुपातदो वस्तुओं के आकार का आपसी मापआदमी और विराट का सापेक्ष आकारशीर्षक ही कविता का केंद्रीय विचार
विराटअसीम, अत्यंत विशालसारा ब्रह्मांडविशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग
नभ गंगाआकाशगंगाब्रह्मांड की परिधिदो शब्दों से बना नया शब्द
अनगिनजिनकी गिनती न हो सकेनक्षत्रों की संख्याअनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
संख्यातीतगिनती से परेदीवारों की संख्याअतिशयोक्ति
शंख1017 अर्थात 100 पद्मदीवारों की संख्या का मापभारतीय संख्या-प्रणाली से लिया गया शब्द
दीवारें उठानाभेद और सीमाएँ खड़ी करनाजाति, धर्म, देश के कृत्रिम बँटवारेमुहावरा
लीनडूबा हुआ, रमा हुआईर्ष्या-अहं में डूबा आदमीतत्सम शब्द
दूजे का स्वामीदूसरे का मालिकअधिकार और वर्चस्व का भावव्यंग्य
निदेशक चिह्न (—)डैशठहराव और आगे आने वाली बात का संकेतविराम चिह्न
  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. अनुपात
  5. सोच-विचार के लिए
  6. अनुमान और कल्पना
  7. शब्द से जुड़े शब्द
  8. सृजन
  9. कविता की रचना
  10. कविता का सौंदर्य
  11. आपके शब्द
  12. आपके प्रश्न
  13. विशेषण और विशेष्य
  14. आपकी बात
  15. संख्यातीत शंख
  16. समावेशन और समानता
  17. आज की पहेली
  18. झरोखे से
  19. साझी समझ
  20. खोजबीन के लिए
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