कक्षा ८ हिंदी अध्याय 8 नए मेहमान के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

नए मेहमान एक एकांकी है — यानी ऐसा नाटक जिसमें केवल एक ही अंक होता है। इसके रचयिता उदयशंकर भट्ट (1898–1966) हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ। उन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे, नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। उपन्यास लोक-परलोक और एकांकी संग्रह पर्दे के पीछे उनकी चर्चित रचनाएँ हैं। पूरी एकांकी एक ही स्थान (भारत के किसी बड़े नगर में किराये का एक छोटा मकान), एक ही रात (गरमी की ऋतु, रात आठ बजे से आधी रात तक) और गिने-चुने पात्रों में घटती है — विश्वनाथ, रेवती, उनके बच्चे प्रमोद और किरण, दो अपरिचित अतिथि नन्हेमल और बाबूलाल, पड़ोसी, तथा अंत में आने वाला आगंतुक (रेवती का भाई)। कथा संवादों से आगे बढ़ती है। घर पहले से ही गरमी, बीमारी, तंग जगह और चिड़चिड़े पड़ोसी से जूझ रहा है — तभी दरवाजा खटखटता है और बिस्तर-संदूक लेकर दो अजनबी भीतर आ जाते हैं। ‘ मान न मान मैं तेरा मेहमान ’ वाली

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्द / पदअर्थएकांकी की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
एकांकीएक ही अंक (भाग) वाला नाटक, जिसमें किसी एक घटना को संक्षेप में दिखाया जाता है“ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।”हमारी कक्षा ने वार्षिकोत्सव में एक एकांकी प्रस्तुत की।
रंगमंच-निर्देशकोष्ठक में दिया गया वह निर्देश जो समय, स्थान, वेशभूषा और अभिनय बताता है“गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय…”रंगमंच-निर्देश पढ़े बिना नाटक का मंचन नहीं हो सकता।
संवादपात्रों द्वारा आपस में कही गई बातें“विश्वनाथ— उफ्फ, बड़ी गरमी है”अच्छे संवाद ही नाटक की जान होते हैं।
नेपथ्यमंच के पीछे का भाग, जहाँ से आवाज़ आती है पर पात्र दिखाई नहीं देता“(नेपथ्य में— ‘अरे बाबू, मेरी धोती दे देना।’)”नेपथ्य से आती आवाज़ ने दर्शकों को चौंका दिया।
यवनिकारंगमंच का परदा; ‘यवनिका’ लिखकर नाटक की समाप्ति दिखाई जाती है“(यवनिका)”अंतिम संवाद के साथ ही यवनिका गिर गई।
भट्टीअनाज भूनने की भट्ठी; यहाँ अत्यंत गरम कमरे के लिए रूपक“मकान है कि भट्टी!”दोपहर में लोहे की छत वाला कमरा भट्टी बन जाता है।
जेलखानाकारागार; यहाँ तंग, हवा-रहित मकान के लिए रूपक“जाने कब तक इस जेलखाने में सड़ना होगा।”बिना खिड़की का वह कमरा जेलखाने जैसा लगता था।
सुकुमारकोमल, नाजुक“इन सुकुमार बालकों का क्या अपराध है?”सुकुमार पौधों को तेज धूप से बचाना पड़ता है।
चर्रानाकपड़े का पसीने या नमी से चरचराकर फटने-सा लगना“धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।”पसीने से कमीज चर्रा रही थी।
अंटीकमर में धोती की गाँठ, जहाँ रुपये-पैसे छिपाए जाते थे“माल-मसाला तो अंटी में है न?”गाँव के बुजुर्ग आज भी अंटी में पैसे रखते हैं।
माल-मसालायहाँ — रुपया-पैसा, धनराशि (चोरी-छिपे कही गई बात)“माल-मसाला तो अंटी में है न?”उसने पूछा कि सारा माल-मसाला सुरक्षित है या नहीं।
बंडीकमीज के ऊपर पहनी जाने वाली बिना बाँह की सदरी“कमीजों के ऊपर काली बंडी, सिर पर सफेद पगड़ियाँ।”सर्दी में उसने कुरते के ऊपर बंडी डाल ली।
हबड़-तबड़अफरा-तफरी, हड़बड़ी“इस हबड़-तबड़ में दोनों बच्चे ऊपर से उतरकर आते हैं।”स्टेशन पर उतरते समय बड़ी हबड़-तबड़ मची।
कदाचितशायद, संभवतः“फिर भी कदाचित कोई मुझे जानता हो”कदाचित वह कल तक लौट आए।
सकपकानापकड़े जाने पर घबरा जाना, बात बनाते न बनना“दोनों (सकपकाकर) चिट्ठी, चिट्ठी तो नहीं लाए हैं।”झूठ पकड़ा जाते ही वह सकपका गया।
तुनकनाचिढ़कर, झुँझलाकर बोलना“रेवती (तुनककर) खाना तो खिलाना ही होगा—”थकान में छोटी-सी बात पर भी वह तुनक जाता है।
तारटेलीग्राफ — बिजली के संकेतों से भेजा जाने वाला शीघ्र संदेश, अब अप्रचलित“क्या मेरा तार नहीं मिला?”पहले जरूरी खबर तार से भेजी जाती थी।
आनापुरानी भारतीय मुद्रा — एक रुपये में सोलह आने“साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।”‘सोलह आने सच’ मुहावरा इसी मुद्रा से बना है।
गजलंबाई नापने की पुरानी इकाई — एक गज = तीन फीट“सवा रुपया गज दी”दुकानदार ने दो गज कपड़ा नाप कर दिया।
  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. एकांकी की रचना
  7. अभिनय की बारी
  8. भाषा की बात
  9. आपकी बात
  10. सावधानी और सुरक्षा
  11. सृजन
  12. गरमी का प्रकोप
  13. तार से संदेश
  14. नाप, तौल और मुद्राएँ
  15. झरोखे से
  16. साझी समझ
  17. खोजबीन के लिए
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