प्र1.
इस एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर
यह खोजबीन का काम है। तीनों शब्दों की जानकारी एक-एक पन्ने पर इकट्ठी कीजिए और अंत में एक छोटी परियोजना-पुस्तिका बनाइए।
| शब्द | क्या है | कब तक चला | और क्या खोजें |
|---|---|---|---|
| आना | पुरानी भारतीय मुद्रा। 1 रुपया = 16 आने, 1 आना = 4 पुराने पैसे = 12 पाई। सिक्के थे — पाई, ढेला, पैसा, आना, दुअन्नी, चवन्नी, अठन्नी। | 1957 में दशमलव मुद्रा (1 रुपया = 100 नए पैसे) आने के बाद धीरे-धीरे बंद। | घर के बुजुर्गों से पूछिए कि उनके बचपन में एक आने में क्या-क्या आता था। ‘सोलह आने सच’ जैसे मुहावरे इकट्ठे कीजिए। यदि किसी के पास पुराना सिक्का हो तो उसका चित्र बनाइए। |
| गज | लंबाई की इकाई। 1 गज = 3 फीट = 36 इंच ≈ 0.914 मीटर। ब्रिटिश (इंपीरियल) प्रणाली से आई। | सरकारी काम में 1956 के बाद मीट्रिक प्रणाली आ गई, पर बाजार में गज आज भी चलता है। | कपड़े की दुकान पर जाकर पूछिए कि गज में नापते हैं या मीटर में। ‘वर्ग गज’ में जमीन कैसे नापी जाती है, यह पता कीजिए। क्रिकेट की पिच 22 गज क्यों होती है, यह भी खोजिए। |
| तार | टेलीग्राफ — बिजली की धारा और पूर्व-निर्धारित संकेतों (मोर्स कोड) से भेजा जाने वाला संदेश। संदेश शब्दों की गिनती के हिसाब से भेजा जाता था, इसलिए बहुत छोटा रखा जाता था। | भारत में पहली तार-सेवा 1850 के दशक में शुरू; 15 जुलाई 2013 को पूरी तरह बंद। | पता कीजिए कि मोर्स कोड में SOS कैसे भेजा जाता है। किसी बुजुर्ग से पूछिए कि उन्हें कभी तार मिला था या नहीं और तब कैसा लगा था। अपने शहर का पुराना डाकघर देखने जाइए। |
परियोजना कैसे प्रस्तुत करें: तीन पन्ने बनाइए — हर पन्ने पर शब्द, उसका अर्थ, एक चित्र, एक जानकारी-तालिका और एक ‘क्या आप जानते हैं?’ बॉक्स। सबसे नीचे लिखिए कि जानकारी कहाँ से मिली — दादी से, पुस्तकालय की किस किताब से, या किस वेबसाइट से। स्रोत लिखना अच्छी खोजबीन की पहचान है।
यह गतिविधि क्यों दी गई: ये तीनों शब्द आज चलन से बाहर हैं, फिर भी हमारी भाषा में जिंदा हैं — ‘चार आने’, ‘दो गज जमीन’, ‘तार भेजना’। भाषा पुरानी चीजों को शब्दों में सँभालकर रखती है। इन्हें खोजना असल में अपने समाज का हाल का इतिहास खोजना है।