मल्हार अध्याय 8 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “रेवती— ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते। विश्वनाथ— क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।” उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर आपका अपना होगा। पर अच्छे उत्तर में चार बातें होनी चाहिए —

  1. स्थिति — क्या हुआ था, कब और कहाँ।
  2. दुविधा — दोनों रास्ते क्या थे और दोनों में कुछ-कुछ ठीक क्यों लग रहा था।
  3. निर्णय — आपने आखिर क्या किया और किस आधार पर।
  4. सीख — अब पीछे मुड़कर देखने पर आप क्या सोचते हैं।

नमूना उत्तर: “कक्षा-परीक्षा के दिन मेरे पास बैठे मित्र ने चुपके से उत्तर पूछ लिया। एक ओर मन कह रहा था कि वह मेरा अच्छा मित्र है और उसकी माँ बीमार होने के कारण वह पढ़ नहीं पाया था; दूसरी ओर यह भी पता था कि परीक्षा में बताना गलत है। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि दोस्ती निभाऊँ या ईमानदारी। मैंने उस समय उत्तर नहीं बताया, पर छुट्टी के बाद उसके घर जाकर पूरा पाठ उसे समझाया और अगली परीक्षा में वह स्वयं अच्छे अंक ले आया। अब मुझे लगता है कि मेरा निर्णय ठीक था — सच्ची मदद वह है जो दूसरे को आगे के लिए तैयार करे, उस क्षण भर के लिए बचा भर न दे।

विश्वनाथ की दुविधा से इसकी तुलना: विश्वनाथ के सामने भी दो सही बातें आमने-सामने थीं — अतिथि का सम्मान और अपने परिवार की रक्षा। दुविधा तब कठिन होती है जब चुनाव सही और गलत के बीच नहीं, बल्कि दो सही बातों के बीच हो। ऐसे में यह देखना चाहिए कि किस निर्णय से किसी को स्थायी नुकसान नहीं होगा।
प्र2.
(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर

यह व्यक्तिगत उत्तर है। इसमें केवल मित्रों के नाम मत गिनाइए — हर नाम के साथ एक कारण और एक घटना दीजिए, तभी उत्तर सच्चा लगेगा।

देखिए एकांकी क्या दिखाती है: नन्हेमल और बाबूलाल की मित्रता उनके संवादों से झलकती है — बाबूलाल हर बात में ‘चाचा’ कहकर बड़े का साथ देता है (“उतना ही मैं।”), नन्हेमल पानी आने पर कहता है “लो चाचा, पहले तुम पी लो”, और मुश्किल में दोनों एक-दूसरे को बचा लेते हैं (“मैं उस समय नहीं था… तुम्हीं ने रेल में बताया था।”)। यानी मित्रता की पहचान बड़े-बड़े वादों में नहीं, छोटे-छोटे व्यवहारों में मिलती है।

नमूना उत्तर: “मेरे सबसे अच्छे मित्र आरव और सलमा हैं। आरव मुझे इसलिए प्रिय है क्योंकि वह मेरी गलती मेरे मुँह पर कह देता है — जब मैंने एक छोटे बच्चे का मजाक उड़ाया था, तो सबके सामने नहीं, पर अकेले में उसने मुझे टोका था। सलमा इसलिए प्रिय है क्योंकि वह सुनना जानती है; मेरे नाना के देहांत के बाद वह रोज मेरे साथ बैठकर बिना कुछ पूछे बस साथ रहती थी। मेरे लिए अच्छा मित्र वह है जो सुख में साथ हँसे और दुख में साथ चुप रह सके।”

प्र3.
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर

एक अच्छे अतिथि की तैयारी दो हिस्सों में होती है — सूचना देने की तैयारी और सामान की तैयारी

तैयारीक्या करेंक्यों
पहले से बतानाफोन या संदेश से बता देना कि हम कब आ रहे हैं, कितने लोग हैं और कितने दिन रुकेंगे।यही वह बात है जो एकांकी में नहीं हुई। रेवती को खाना बनाने का समय ही नहीं मिला और सारा तनाव इसी से खड़ा हुआ।
पहुँचने का समयदिन में पहुँचने की कोशिश करना; बहुत रात या बहुत सवेरे पहुँचने से बचना।नन्हेमल और बाबूलाल रात आठ बजे के बाद पहुँचे, जब घर सोने की तैयारी कर रहा था।
पता ठीक से लेनापूरा पता, गली का नाम और फोन नंबर पहले लिख लेना।दोनों मेहमानों को न गली का नाम याद था, न जिससे मिलना था उसका नाम — इसीलिए गलत घर पहुँच गए।
अपना सामानअपने कपड़े, तौलिया, दवाइयाँ, चार्जर, पानी की बोतल साथ रखना।ताकि मेजबान पर छोटी-छोटी चीजों का बोझ न पड़े।
छोटा-सा उपहारघर के बच्चों के लिए कुछ ले जाना या अपने क्षेत्र की कोई चीज ले जाना।यह दिखाता है कि आप सोच-समझकर आए हैं।
घर के नियम पूछनापानी, नहाने और सोने की व्यवस्था के बारे में पूछ लेना और उसी के अनुसार चलना।छत पर हाथ धोकर पानी फैलाना — पड़ोसी से झगड़ा इसी छोटी-सी लापरवाही से हुआ।
सार: एक अच्छा अतिथि वह है जिसका आना मेजबान के लिए आयोजन बने, आपत्ति नहीं। और इसके लिए सबसे बड़ी चीज सूचना है — मेजबान को तैयारी का समय देना ही सबसे बड़ा शिष्टाचार है।
प्र4.
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर

उत्तर अपने अनुभव से लिखिए, पर उसे केवल ‘अच्छे-अच्छे’ वाक्यों की सूची मत बनाइए — असली उदाहरण दीजिए।

ऐसे सहयोग किए जा सकते हैं:

  • पड़ोसी के घर कोई न हो तो उनका कूरियर या डाक ले लेना और लौटने पर दे देना।
  • बुजुर्ग पड़ोसियों का सामान सीढ़ियों तक पहुँचाना, दवा लाकर देना।
  • बीमारी या दुर्घटना में तुरंत सहायता करना, जरूरत पड़े तो अपने माता-पिता को बुलाना।
  • छोटे बच्चों को त्योहार, जन्मदिन या पढ़ाई में साथ ले लेना।
  • तेज आवाज में संगीत न बजाना, सीढ़ियों और साझी छत को साफ रखना — यह भी सहयोग ही है।
  • पानी, बिजली या सफाई की साझी समस्या पर मिलकर बात करना।

नमूना उत्तर: “हमारे बगल में एक अकेली बुजुर्ग महिला रहती हैं। उनकी आँखें कमजोर हैं, इसलिए मैं सप्ताह में दो बार उनके पत्र और बिजली का बिल पढ़कर सुना देती हूँ। पिछली गरमी में जब उनके घर पानी की मोटर खराब हो गई, तो हमने तीन दिन तक अपने घर से पानी भरकर पहुँचाया। वे बदले में हमारे लिए अचार बनाकर भेजती हैं।”

एकांकी से जोड़िए: विश्वनाथ के पड़ोसी के पास खाली छत थी और बच्चों को केवल एक खाट चाहिए थी। जो चीज उसके पास फालतू पड़ी थी, वही देने से उसने मना कर दिया। इससे सीखने लायक बात यह है कि सहयोग में अक्सर कोई नुकसान नहीं होता, केवल थोड़ी-सी उदारता चाहिए होती है।
प्र5.
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर

अतिथि का व्यवहार कैसा हो, यह समझने का सबसे आसान तरीका है — देखिए कि नन्हेमल और बाबूलाल ने क्या-क्या किया, और उसका उल्टा कीजिए।

नन्हेमल और बाबूलाल ने क्या कियाएक अच्छे अतिथि को क्या करना चाहिए
अपना परिचय कभी साफ नहीं दिया — “हम तो आपके पास के हैं।”पहुँचते ही स्पष्ट परिचय देना — मैं कौन हूँ, किसके कहने पर आया हूँ।
बिना सूचना और बिना चिट्ठी के रात को आ धमके।पहले से खबर देना और उचित समय पर पहुँचना।
माँग-माँगकर सेवा कराई — “दस से कम नहीं पीऊँगा”, “नहाने का प्रबंध तो होगा?”जो मिल जाए उसी में संतोष करना; अपना काम यथासंभव स्वयं करना।
घर की स्थिति की परवाह नहीं की, जबकि किरण दो बार खाने के बारे में पूछ चुकी थी।मेजबान की सुविधा-असुविधा पर ध्यान देना और बोझ कम करना।
पड़ोसी की छत पर पानी फैला दिया।घर और आस-पड़ोस के नियमों का पालन करना।
पूछे जाने पर बहाने बनाए — “नाम तो याद नहीं आता।”सच बोलना; गलती हो जाए तो स्वीकार करना।

तुलना कीजिए — रेवती का भाई भी बिना खबर पहुँचा (क्योंकि तार नहीं मिला), पर उसका व्यवहार बिलकुल अलग है। वह कहता है — “शायद रात को आप लोगों को कोई कष्ट हो” और “इस समय खाना-वाना रहने दो। मैं पानी पीकर सो जाऊँगा।” वह होटल में ठहरने तक की बात सोचता है। यही एक सच्चे अतिथि का लक्षण है — वह अपने आराम से पहले मेजबान की सुविधा सोचता है।

ध्यान रखने की बात: ‘अतिथि देवो भव’ केवल मेजबान के लिए नियम नहीं है। यह अतिथि पर भी उतनी ही जिम्मेदारी डालता है — देवता वही कहलाता है जो लेता कम है और देता अधिक है।
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