यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर आपका अपना होगा। पर अच्छे उत्तर में चार बातें होनी चाहिए —
- स्थिति — क्या हुआ था, कब और कहाँ।
- दुविधा — दोनों रास्ते क्या थे और दोनों में कुछ-कुछ ठीक क्यों लग रहा था।
- निर्णय — आपने आखिर क्या किया और किस आधार पर।
- सीख — अब पीछे मुड़कर देखने पर आप क्या सोचते हैं।
नमूना उत्तर: “कक्षा-परीक्षा के दिन मेरे पास बैठे मित्र ने चुपके से उत्तर पूछ लिया। एक ओर मन कह रहा था कि वह मेरा अच्छा मित्र है और उसकी माँ बीमार होने के कारण वह पढ़ नहीं पाया था; दूसरी ओर यह भी पता था कि परीक्षा में बताना गलत है। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि दोस्ती निभाऊँ या ईमानदारी। मैंने उस समय उत्तर नहीं बताया, पर छुट्टी के बाद उसके घर जाकर पूरा पाठ उसे समझाया और अगली परीक्षा में वह स्वयं अच्छे अंक ले आया। अब मुझे लगता है कि मेरा निर्णय ठीक था — सच्ची मदद वह है जो दूसरे को आगे के लिए तैयार करे, उस क्षण भर के लिए बचा भर न दे।”