मल्हार अध्याय 8 सावधानी और सुरक्षा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर

मैं दरवाजे पर ही, विनम्रता से पर स्पष्ट रूप से, पूरा परिचय पूछ लेता — और परिचय स्पष्ट हुए बिना उन्हें घर के भीतर न ले जाता।

मैं क्रम से यह करता:

  1. दरवाजा पूरा न खोलकर पहले पूछता — “आप कौन हैं और किससे मिलना है?” भीतर आने का न्योता उत्तर मिलने के बाद देता।
  2. किसका नाम लेकर आए हैं, यह पक्का करता — वे ‘संपतराम’ का नाम ले रहे थे, जिसे विश्वनाथ जानता ही नहीं था। यहीं रुककर पूछ लेना चाहिए था।
  3. पता मिलाता — उन्हें ‘रेलवे रोड, कृष्णा गली’ जाना था। यह पता विश्वनाथ के घर का है या नहीं, यह पहले ही मिल जाता।
  4. किसी प्रमाण की बात करता — “कोई चिट्ठी लाए हैं?” यह प्रश्न विश्वनाथ ने बहुत देर से पूछा। यह पहला प्रश्न होना चाहिए था।
  5. पड़ोस या परिवार को साथ रखता — यदि संदेह बना रहता, तो घर के किसी बड़े व्यक्ति को साथ बुला लेता।
  6. मदद से मना न करता — मैं उन्हें भीतर न बुलाकर भी पानी पिला सकता था, सही पता बता सकता था और पास की धर्मशाला या कविराज रामलाल वैद्य का घर बता सकता था। सावधानी और सज्जनता साथ-साथ चल सकती हैं।
विश्वनाथ से यह चूक क्यों हुई: वह अशिष्ट कहलाने से डर गया। उसने हर बार प्रश्न शुरू किया और ‘क्षमा कीजिएगा’ कहकर बीच में छोड़ दिया। सीखने की बात यह है — परिचय पूछना अशिष्टता नहीं है। अशिष्टता तरीके में होती है, प्रश्न में नहीं।
प्र2.
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर

घर पर अकेले होने पर सबसे बड़ा नियम एक ही है — दरवाजा न खोलें और बातचीत दरवाजे के भीतर से ही करें।

करना चाहिएनहीं करना चाहिए
पहले आइ-होल या खिड़की से देखना कि कौन है।बिना देखे दरवाजा खोल देना।
दरवाजा बंद रखकर पूछना — “आप कौन हैं? किससे काम है?”यह बता देना कि “घर पर कोई नहीं है, मैं अकेला हूँ।” इसके बजाय कहिए — “पापा अभी व्यस्त हैं, आप बाद में आइए।”
तुरंत माता-पिता को फोन करना और उन्हें बताना कि कौन आया है।अपना नाम, स्कूल, पता या घर का समय-चक्र बताना।
मरम्मत, बिजली-पानी या डिलीवरी वाले को माता-पिता के लौटने तक रुकने के लिए कहना।किसी भी अपरिचित को घर के भीतर बुलाना, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो।
पैकेट या सामान लेने से पहले माता-पिता से पूछ लेना।अपरिचित से मिली खाने-पीने की चीज लेना।
घबराहट हो तो भरोसेमंद पड़ोसी को बुलाना, या 112 (आपातकालीन नंबर) / 1098 (चाइल्डलाइन) पर फोन करना।चुप रह जाना या डर के कारण किसी को न बताना।
पहले से तैयारी: माता-पिता, एक पड़ोसी और एक रिश्तेदार के फोन नंबर कहीं लिखकर या फोन में सहेजकर रखिए। दरवाजे की चटखनी और चेन ठीक हालत में हों, यह भी देख लीजिए।
‘नए मेहमान’ से सीख: एकांकी में मेहमान चोर नहीं निकले — पर विश्वनाथ को यह पता नहीं था जब उसने उन्हें भीतर बुलाया। सावधानी इसलिए नहीं बरती जाती कि सामने वाला बुरा है; इसलिए बरती जाती है कि हमें अभी पता नहीं कि वह कौन है।
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