प्र1.
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर
‘नए मेहमान’ की विशेषताएँ, एकांकी के लक्षणों के अनुसार —
| विशेषता | एकांकी से प्रमाण |
|---|---|
| एक ही अंक | पूरी रचना कहीं भी अंक या दृश्य में नहीं बँटती; आरंभ से ‘यवनिका’ तक एक ही प्रवाह है। |
| एक ही स्थान | “स्थान — भारत का कोई बड़ा नगर”; और सारा घटनाक्रम विश्वनाथ के उसी एक कमरे में घटता है। छत, आँगन और नल की घटनाएँ भी मंच पर नहीं, संवादों में आती हैं। |
| एक ही समय | “गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय” से लेकर आधी रात तक — कुछ ही घंटों की कथा। |
| सीमित पात्र | विश्वनाथ, रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल, प्रमोद, किरण, पड़ोसी और आगंतुक — गिनती के पात्र, और हर एक का काम निश्चित। |
| एक ही समस्या पर केंद्रित कथानक | पूरी एकांकी एक ही प्रश्न पर टिकी है — ‘ये मेहमान कौन हैं और इनका क्या किया जाए?’ कोई उपकथा नहीं। |
| संवाद-प्रधानता | लेखक कहीं भी अपनी ओर से कथा नहीं कहता; सब कुछ पात्रों के मुँह से खुलता है। |
| आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय | “विश्वनाथ — गृहपति”, “नन्हेमल, बाबूलाल — अतिथि”, “रेवती — विश्वनाथ की पत्नी” आदि। |
| कोष्ठक में रंगमंच-निर्देश | “कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे… मेज पर रखा हुआ पुराना पंखा चल रहा है… कमरा बेहद गरम है।” |
| अभिनय संकेत | (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई), (तुनककर), (सकपकाकर), (खीझकर), (उछलकर), (इशारे से), (प्रसन्न होकर)। |
| वेशभूषा संबंधी निर्देश | “कमीजों के ऊपर काली बंडी, सिर पर सफेद पगड़ियाँ… दोनों मैली धोतियाँ पहने हैं।” उम्र और चेहरे तक बताए गए हैं। |
| नेपथ्य का प्रयोग | “(नेपथ्य में— ‘अरे बाबू, मेरी धोती दे देना।’)” और “(नेपथ्य में— भले आदमी, न जाने कहाँ मकान लिया है—)”। |
| यवनिका से समाप्ति | अंतिम संवाद के बाद “(यवनिका)” लिखकर परदा गिरने का संकेत। |
| बोलचाल की सजीव भाषा | मुहावरे और रोजमर्रा के प्रयोग — “मकान है कि भट्टी!”, “जान में जान आई”, “हाँ नहीं तो!” |
| अंत में चौंकाने वाला मोड़ | पता चलता है कि मेहमानों को कविराज रामलाल वैद्य के यहाँ जाना था; और उनके जाते ही असली मेहमान — रेवती का भाई — आ पहुँचता है। |
क्यों यही विशेषताएँ: एकांकी को कम समय में एक ही बैठक में मंच पर पूरा होना होता है। इसीलिए उसमें स्थान, समय, पात्र और समस्या — चारों सीमित रखे जाते हैं। ‘नए मेहमान’ इन चारों कसौटियों पर खरी उतरती है, इसीलिए यह एकांकी है, नाटक नहीं।