मल्हार अध्याय 8 एकांकी की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर

‘नए मेहमान’ की विशेषताएँ, एकांकी के लक्षणों के अनुसार —

विशेषताएकांकी से प्रमाण
एक ही अंकपूरी रचना कहीं भी अंक या दृश्य में नहीं बँटती; आरंभ से ‘यवनिका’ तक एक ही प्रवाह है।
एक ही स्थान“स्थान — भारत का कोई बड़ा नगर”; और सारा घटनाक्रम विश्वनाथ के उसी एक कमरे में घटता है। छत, आँगन और नल की घटनाएँ भी मंच पर नहीं, संवादों में आती हैं।
एक ही समय“गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय” से लेकर आधी रात तक — कुछ ही घंटों की कथा।
सीमित पात्रविश्वनाथ, रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल, प्रमोद, किरण, पड़ोसी और आगंतुक — गिनती के पात्र, और हर एक का काम निश्चित।
एक ही समस्या पर केंद्रित कथानकपूरी एकांकी एक ही प्रश्न पर टिकी है — ‘ये मेहमान कौन हैं और इनका क्या किया जाए?’ कोई उपकथा नहीं।
संवाद-प्रधानतालेखक कहीं भी अपनी ओर से कथा नहीं कहता; सब कुछ पात्रों के मुँह से खुलता है।
आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय“विश्वनाथ — गृहपति”, “नन्हेमल, बाबूलाल — अतिथि”, “रेवती — विश्वनाथ की पत्नी” आदि।
कोष्ठक में रंगमंच-निर्देश“कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे… मेज पर रखा हुआ पुराना पंखा चल रहा है… कमरा बेहद गरम है।”
अभिनय संकेत(आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई), (तुनककर), (सकपकाकर), (खीझकर), (उछलकर), (इशारे से), (प्रसन्न होकर)।
वेशभूषा संबंधी निर्देश“कमीजों के ऊपर काली बंडी, सिर पर सफेद पगड़ियाँ… दोनों मैली धोतियाँ पहने हैं।” उम्र और चेहरे तक बताए गए हैं।
नेपथ्य का प्रयोग“(नेपथ्य में— ‘अरे बाबू, मेरी धोती दे देना।’)” और “(नेपथ्य में— भले आदमी, न जाने कहाँ मकान लिया है—)”।
यवनिका से समाप्तिअंतिम संवाद के बाद “(यवनिका)” लिखकर परदा गिरने का संकेत।
बोलचाल की सजीव भाषामुहावरे और रोजमर्रा के प्रयोग — “मकान है कि भट्टी!”, “जान में जान आई”, “हाँ नहीं तो!”
अंत में चौंकाने वाला मोड़पता चलता है कि मेहमानों को कविराज रामलाल वैद्य के यहाँ जाना था; और उनके जाते ही असली मेहमान — रेवती का भाई — आ पहुँचता है।
क्यों यही विशेषताएँ: एकांकी को कम समय में एक ही बैठक में मंच पर पूरा होना होता है। इसीलिए उसमें स्थान, समय, पात्र और समस्या — चारों सीमित रखे जाते हैं। ‘नए मेहमान’ इन चारों कसौटियों पर खरी उतरती है, इसीलिए यह एकांकी है, नाटक नहीं।
प्र2.
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए। 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर
क्र.वाक्यहाँ / नहींकारण
1.पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँसारा घटनाक्रम विश्वनाथ के एक कमरे में होता है। छत, नल और आँगन की बातें भी संवाद के रास्ते ही मंच तक आती हैं।
2.एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहींकुल आठ पात्र हैं और उनमें भी मंच पर एक साथ चार-पाँच से अधिक नहीं आते। एकांकी में पात्र सीमित ही रखे जाते हैं।
3.एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँबिना बुलाए दो मेहमानों का आना, संदेह, पूछताछ और अंत में गलत घर का खुलासा — यह पूरी कहानी है, जो संवादों में गुँथी हुई है।
4.एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहींकहानी लेखक स्वयं सुनाता है और वह पढ़ने के लिए होती है; एकांकी पात्रों के संवादों से चलती है और मंच पर खेलने के लिए लिखी जाती है। उसमें रंगमंच-निर्देश, वेशभूषा और अभिनय संकेत होते हैं।
5.घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहींपूरी कथा एक ही रात की है — “रात के आठ बजे का समय” से लेकर “ढूँढ़ते-ढूँढ़ते आधी रात हो गई” तक।
6.कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँगरमी, गरीबी, पड़ोसी की कड़वाहट और मेहमानों का झूठ — हर बात किसी न किसी पात्र के मुँह से हम तक पहुँचती है।
7.पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ(तुनककर), (सकपकाकर), (खीझकर), (उछलकर), (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) — ये सब अभिनय संकेत हैं।
वाक्य 3 और 4 को साथ पढ़िए: दोनों एक-दूसरे को काटते नहीं। एकांकी में कहानी होती जरूर है (इसलिए 3 पर ‘हाँ’), पर कहने का तरीका बिलकुल अलग होता है (इसलिए 4 पर ‘नहीं’)। यही अंतर पहचानना इस गतिविधि का असली उद्देश्य है।
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