मल्हार अध्याय 8 अभिनय की बारी

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए— इस एकांकी में आप क्या-क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर में तीन बातें अवश्य आनी चाहिए — मंच की तैयारी, पात्रों की तैयारी और आपके अपने जोड़े हुए विचार

तैयारीक्या-क्याएकांकी में आधार
मंच-सज्जाएक मेज (उस पर कुछ किताबें और अखबार), दो कुर्सियाँ, एक पलंग, एक खूँटी, एक पुराना टेबल-पंखा, पानी का घड़ा और लोटा-गिलास।आरंभ का रंगमंच-निर्देश यही सामान गिनाता है।
दरवाजों की व्यवस्थादो प्रवेश-मार्ग — एक बाहर जाने के लिए (दक्षिण), एक भीतर के लिए (पश्चिम)। परदे या कुर्सियों से दोनों ओर के रास्ते अलग दिखाए जा सकते हैं।“दक्षिण का द्वार बाहर आने-जाने के लिए। पश्चिम का द्वार भीतर खुलता है।”
वेशभूषाविश्वनाथ — कुरता-धोती; रेवती — साड़ी, हाथ में पंखा; नन्हेमल और बाबूलाल — कमीज के ऊपर काली बंडी, सिर पर सफेद पगड़ी, मैली धोती, कंधे पर बिस्तर और हाथ में संदूक; प्रमोद-किरण — साधारण बच्चों के कपड़े।पुस्तक स्वयं वेशभूषा बता देती है — उसे बदलने की जरूरत नहीं।
ध्वनि (जो और रोचक बनाएगी)दरवाजा खटखटाने की आवाज, नेपथ्य से पड़ोसन के चिल्लाने की आवाज, पंखे की घरघराहट, गट-गट पानी पीने की आवाज, और अंत में रात के सन्नाटे की धीमी ध्वनि।“(बाहर से कोई दरवाजा खटखटाता है।)”, “(नेपथ्य में— …)”
प्रकाशपीली, मद्धिम रोशनी — रात और उमस का प्रभाव पैदा करेगी। पड़ोसी के प्रवेश पर रोशनी थोड़ी तेज करके तनाव बढ़ाया जा सकता है।“रात के आठ बजे का समय।”
क्या जोड़ सकते हैंआरंभ में एक छोटा सूत्रधार जो दर्शकों को समय और स्थान बता दे; बीच में गली से गुजरते कुल्फी वाले की आवाज; अंत में तार लेकर आते डाकिये की एक झलक, जिससे पता चले कि तार देर से पहुँचा।‘तार न मिलना’ एकांकी का एक बड़ा सूत्र है, जिसे मंच पर दिखाया जा सकता है।

नमूना उत्तर: “मैंने अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव में एक एकांकी देखी थी। ‘नए मेहमान’ का मंचन करने के लिए मैं सबसे पहले कक्षा की एक मेज, दो कुर्सियाँ और एक तख्त मंच पर रखूँगा और पीछे एक पुराना पंखा लगाऊँगा। सबसे जरूरी है गरमी का एहसास — इसके लिए हर पात्र बार-बार पसीना पोंछेगा और हाथ के पंखे से हवा करेगा। मैं आरंभ में एक सूत्रधार जोड़ूँगा जो दो पंक्तियों में समय-स्थान बता दे, और अंत में तार लेकर आते डाकिये को दिखाऊँगा, जिससे दर्शकों को समझ आए कि खबर देर से क्यों पहुँची।”

Tip: जोड़ते समय यह देखिए कि जोड़ी गई चीज कहानी को आगे बढ़ाए, केवल सजावट न रहे। डाकिया जोड़ना अच्छा है क्योंकि वह ‘तार न मिलने’ की गुत्थी सुलझाता है; बिना काम का कोई पात्र जोड़ना एकांकी को कमजोर कर देगा।
प्र2.
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा।
उत्तर

यह समूह-कार्य है। इसे व्यवस्थित रूप से करने का तरीका नीचे दिया गया है।

1. भूमिकाएँ बाँटिए — आठ अभिनय-भूमिकाएँ हैं और तीन मंच के पीछे की।

पात्रस्वभाव — अभिनय में क्या दिखाना है
विश्वनाथ (45 वर्ष)गंभीर, संकोची, थका हुआ। आवाज धीमी और शिष्ट, पर बीच-बीच में झुँझलाहट (खीझकर)। वाक्य अधूरे छोड़ने की आदत — “जी, आप लोग…”
रेवतीबीमार, चिड़चिड़ी, पर भीतर से उदार। सिर दबाना और आँचल से पसीना पोंछना उसका स्थायी हाव-भाव है। अंत में स्वर बिलकुल बदल जाना चाहिए — प्रसन्न और स्नेह भरा।
नन्हेमल (35 वर्ष)बड़ी मूँछें, बेझिझक, बातूनी। ऊँची आवाज, बात टालने की कला। ‘हाँ साहब’ उसका तकियाकलाम है।
बाबूलाल (24 वर्ष)अधकटी मूँछें, लंबा मुख। छोटा है, इसलिए बड़े की हाँ में हाँ मिलाता है और ‘चाचा’ कहकर पुकारता है। ‘हाँ नहीं तो!’ उसका तकियाकलाम है।
प्रमोदसमझदार, दौड़-भाग करने वाला बड़ा बेटा। शांत स्वर, तेज चाल।
किरणछोटी, धीरे से बात करने वाली। “(विश्वनाथ से धीरे से) फिर खाना?” — यह पंक्ति फुसफुसाकर बोलनी है।
पड़ोसीतेज कदमों से प्रवेश, ऊँची और कटु आवाज, शिकायती लहजा।
आगंतुक (रेवती का भाई)थका हुआ पर स्नेही और संकोची। उसका प्रवेश ही मंच का वातावरण बदल दे।
मंच के पीछेध्वनि (दरवाजा, नेपथ्य की आवाजें), प्रकाश, और सामान सँभालने वाला — तीन साथी।

2. समय बाँटिए (15 मिनट के लिए) —

  • 0–4 मिनट : विश्वनाथ और रेवती की गरमी, मकान और पड़ोसी वाली बातचीत।
  • 4–8 मिनट : दस्तक, दोनों मेहमानों का प्रवेश, पानी-खाना और नहाने की माँग।
  • 8–11 मिनट : रेवती की झुँझलाहट, पड़ोसी का झगड़ा।
  • 11–14 मिनट : पूछताछ, ‘कविराज रामलाल वैद्य’ का खुलासा, मेहमानों का जाना।
  • 14–15 मिनट : भाई का प्रवेश और रेवती का अंतिम संवाद, फिर यवनिका।

3. अभ्यास कीजिए — पहले बैठकर संवाद पढ़िए, फिर खड़े होकर चाल और मुद्रा के साथ, फिर सामान के साथ पूरा दोहराइए। पुस्तक के सुझाव मानिए — आस-पास की चीजें (कुर्सी, मेज) ही काम में लीजिए और जगह कम हो तो अपने स्थान पर खड़े-खड़े संवाद बोलिए।

अभिनय का एक सूत्र: इस एकांकी की सबसे बड़ी चुनौती संवाद नहीं, गरमी है। यदि हर पात्र लगातार पसीना पोंछता रहे, कपड़े झटकता रहे और पंखा झलता रहे, तो दर्शक को उमस दिखने लगेगी — और तभी मेहमानों का बोझ भी उसे महसूस होगा।
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