यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर में तीन बातें अवश्य आनी चाहिए — मंच की तैयारी, पात्रों की तैयारी और आपके अपने जोड़े हुए विचार।
| तैयारी | क्या-क्या | एकांकी में आधार |
|---|---|---|
| मंच-सज्जा | एक मेज (उस पर कुछ किताबें और अखबार), दो कुर्सियाँ, एक पलंग, एक खूँटी, एक पुराना टेबल-पंखा, पानी का घड़ा और लोटा-गिलास। | आरंभ का रंगमंच-निर्देश यही सामान गिनाता है। |
| दरवाजों की व्यवस्था | दो प्रवेश-मार्ग — एक बाहर जाने के लिए (दक्षिण), एक भीतर के लिए (पश्चिम)। परदे या कुर्सियों से दोनों ओर के रास्ते अलग दिखाए जा सकते हैं। | “दक्षिण का द्वार बाहर आने-जाने के लिए। पश्चिम का द्वार भीतर खुलता है।” |
| वेशभूषा | विश्वनाथ — कुरता-धोती; रेवती — साड़ी, हाथ में पंखा; नन्हेमल और बाबूलाल — कमीज के ऊपर काली बंडी, सिर पर सफेद पगड़ी, मैली धोती, कंधे पर बिस्तर और हाथ में संदूक; प्रमोद-किरण — साधारण बच्चों के कपड़े। | पुस्तक स्वयं वेशभूषा बता देती है — उसे बदलने की जरूरत नहीं। |
| ध्वनि (जो और रोचक बनाएगी) | दरवाजा खटखटाने की आवाज, नेपथ्य से पड़ोसन के चिल्लाने की आवाज, पंखे की घरघराहट, गट-गट पानी पीने की आवाज, और अंत में रात के सन्नाटे की धीमी ध्वनि। | “(बाहर से कोई दरवाजा खटखटाता है।)”, “(नेपथ्य में— …)” |
| प्रकाश | पीली, मद्धिम रोशनी — रात और उमस का प्रभाव पैदा करेगी। पड़ोसी के प्रवेश पर रोशनी थोड़ी तेज करके तनाव बढ़ाया जा सकता है। | “रात के आठ बजे का समय।” |
| क्या जोड़ सकते हैं | आरंभ में एक छोटा सूत्रधार जो दर्शकों को समय और स्थान बता दे; बीच में गली से गुजरते कुल्फी वाले की आवाज; अंत में तार लेकर आते डाकिये की एक झलक, जिससे पता चले कि तार देर से पहुँचा। | ‘तार न मिलना’ एकांकी का एक बड़ा सूत्र है, जिसे मंच पर दिखाया जा सकता है। |
नमूना उत्तर: “मैंने अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव में एक एकांकी देखी थी। ‘नए मेहमान’ का मंचन करने के लिए मैं सबसे पहले कक्षा की एक मेज, दो कुर्सियाँ और एक तख्त मंच पर रखूँगा और पीछे एक पुराना पंखा लगाऊँगा। सबसे जरूरी है गरमी का एहसास — इसके लिए हर पात्र बार-बार पसीना पोंछेगा और हाथ के पंखे से हवा करेगा। मैं आरंभ में एक सूत्रधार जोड़ूँगा जो दो पंक्तियों में समय-स्थान बता दे, और अंत में तार लेकर आते डाकिये को दिखाऊँगा, जिससे दर्शकों को समझ आए कि खबर देर से क्यों पहुँची।”