अर्थ: गरमी इतनी है कि पानी पेट भर चुका है, पर प्यास फिर भी नहीं मरी। विश्वनाथ चार गिलास पीकर आया है और होंठ अब भी सूख रहे हैं।
भाव: यह पंक्ति एक साथ दो बातें कहती है। ऊपर से यह गरमी की तीव्रता बताती है। भीतर से यह उस परिवार की पूरी हालत का चित्र है — जो उपाय उनके पास है, वह उनकी तकलीफ के आगे बहुत छोटा है। पानी है, पर राहत नहीं; मकान है, पर हवा नहीं; कमाई है, पर बड़ा मकान नहीं।