मल्हार अध्याय 8 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा? • अतिथियों की सेवा करने के कारण • किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण • आज्ञाकारिता के भाव के कारण • गरमी को चुपचाप सहने के कारण
उत्तर

तारा (★) तीन विकल्पों पर लगेगा — अतिथियों की सेवा करने के कारण, किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण और आज्ञाकारिता के भाव के कारण

यह बात नन्हेमल तब कहता है जब प्रमोद कहीं से बरफ का ठंडा पानी ढूँढ़ लाता है और दोनों गट-गट पीकर तृप्त हो जाते हैं — “कितने सीधे लड़के हैं।” और बाबूलाल तुरंत जोड़ता है — “शहर के हैं न!”

विकल्पसही / ग़लतपाठ से आधार
अतिथियों की सेवा करने के कारणसही ★प्रमोद बरफ का पानी लाता है, किरण पंखा तेज करती है — बिना किसी शिकायत के।
किसी तरह का प्रश्न न करने के कारणसही ★बड़े लोग बार-बार पूछते हैं “आप कहाँ से आए हैं?”, पर बच्चे कुछ नहीं पूछते। नाम पूछे जाने पर बस “प्रमोद।” “किरण।” कहकर चुप हो जाते हैं।
आज्ञाकारिता के भाव के कारणसही ★“ज़रा कुर्सी इधर खिसका दो”, “पंखा तेज कर देना, किरण” — हर आदेश तुरंत माना जाता है।
गरमी को चुपचाप सहने के कारणग़लतगरमी तो घर का हर व्यक्ति सह रहा है। यह बात नन्हेमल ने बच्चों के व्यवहार पर कही है, गरमी सहने पर नहीं।
‘सीधा’ शब्द का असली रंग: यहाँ ‘सीधा’ केवल तारीफ नहीं है। हिंदी में ‘सीधा’ का अर्थ भोला, जो सवाल न करे भी होता है। नन्हेमल और बाबूलाल असल में यह जाँच रहे हैं कि इस घर में उनसे कोई कड़ा सवाल तो नहीं पूछेगा। इसीलिए बाबूलाल का ताना — “शहर के हैं न!” — भी साथ आता है। एकांकीकार ने इन दो शब्दों से ही दोनों मेहमानों की नीयत खोल दी है।
प्र2.
2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा? • उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं • पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं • लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं • अतिथियों का अपमान करते हैं
उत्तर

तारा (★) पहले दो विकल्पों पर — उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं और पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं। तीसरा विकल्प भी तर्क के साथ लिया जा सकता है।

विकल्पसही / ग़लतपाठ से आधार
उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैंसही ★रेवती के अपने शब्द — “वे तो हमको मुसीबत में देखकर प्रसन्न होते हैं।” लाला की औरत का जवाब भी यही सिद्ध करता है — “उन्हें और किसी को सोता देखकर नींद नहीं आती।”
पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैंसही ★ठीक इसी वाक्य में विश्वनाथ का कारण छिपा है — “जो खाली छत पड़ी रहने पर भी बच्चों के लिए एक खाट नहीं बिछाने देंगे।”
लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैंतर्क सहित सही ★आगे का दृश्य इसका प्रमाण है — थोड़ा-सा पानी फैलने पर पड़ोसी तेजी से भीतर आ जाता है, पुरानी बात उखाड़ता है और कहता है “आपसे रोज ही गलती होती है।”
अतिथियों का अपमान करते हैंग़लतपड़ोसी अतिथियों से मिलता तक नहीं। उसकी नाराजगी विश्वनाथ पर है — “मेहमान आपके होंगे, मेरे नहीं।”
ध्यान दीजिए: जिस समय विश्वनाथ यह वाक्य बोलता है, पड़ोसी वाला झगड़े का दृश्य अभी हुआ ही नहीं है। इसलिए उसके मन में उस समय सीधे-सीधे दो ही बातें हैं — सहयोग न करना और दूसरे के दुख में खुश होना। तीसरा विकल्प पूरी एकांकी पढ़ लेने के बाद ही उचित ठहरता है।
प्र3.
3. “ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है? • मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण • रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण • अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण • उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
उत्तर

तारा (★) पहले तीन विकल्पों पर — मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण, रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण और अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण

विकल्पसही / ग़लतपाठ से आधार
ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारणसही ★“छत इतनी छोटी है कि पूरी खाटें भी तो नहीं आतीं। एक खाट पर दो-दो, तीन-तीन बच्चे सोते हैं, तब भी पूरा नहीं पड़ता।” — घर में स्वयं परिवार के लिए जगह नहीं है।
स्वास्थ्य ठीक न होने के कारणसही ★“पिछले पंद्रह दिन से दर्द के मारे सिर फट रहा है।” आगे वह बताती है कि हाथ-पैर अब बैठे-बैठे भी सुन्न हो जाते हैं।
घर का कार्य बढ़ जाने के कारणसही ★“मैं ही जानती हूँ जैसे रोटी बनाती हूँ।” नौकर टिकता नहीं, पानी तीन मंजिल चढ़ाना पड़ता है — सारा बोझ अकेली रेवती पर है।
उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारणग़लतएकांकी का अंत ही इसे काट देता है। भाई के आते ही वही रेवती, उसी सिरदर्द और उसी गरमी में कहती है — “मैं अभी खाना बनाती हूँ… भैया भूखे नहीं सो सकते।”
यही एकांकी का केंद्रीय विचार है: रेवती को अतिथि से चिढ़ नहीं है — उसे सामर्थ्य से बाहर के आतिथ्य से चिढ़ है। तंग मकान, बीमार शरीर, खाली जेब और अकेले हाथ — इन चार सीमाओं के भीतर हर मेहमान एक संकट बन जाता है। एकांकीकार उसे स्वार्थी नहीं दिखाता, थका हुआ दिखाता है।
प्र4.
4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है? • पानी की कमी होने की • पड़ोसियों के चिल्लाने की • मेहमानों के आने की • गरमी के कारण बीमारी की
उत्तर

तारा (★) मेहमानों के आने की — इसी विकल्प पर।

यह वाक्य ठीक उस क्षण निकलता है जब बाहर से कोई दरवाजा खटखटाता है। विश्वनाथ कहता है “न जाने। देखता हूँ।” और रेवती के मुँह से यह डर निकल पड़ता है। थोड़ी ही देर पहले वह कह चुकी थी — “ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” दरवाजे की दस्तक ने उसी डर को छू लिया।

विकल्पक्यों नहीं
पानी की कमी होने कीपानी की शिकायत घर में पहले से है, पर वह ‘आने वाली’ मुसीबत नहीं — दस्तक से उसका कोई संबंध नहीं।
पड़ोसियों के चिल्लाने कीपड़ोसी दरवाजा नहीं खटखटाते; वे तो सीधे छत से चिल्लाते हैं। वह दृश्य भी अभी आगे आना है।
गरमी के कारण बीमारी कीयह उसका पुराना डर है (“मुझे डर है, कहीं कोई बीमार न पड़ जाए”), पर इस दस्तक वाले क्षण की बात नहीं।
नाटक पढ़ने का सूत्र: संवाद का अर्थ हमेशा उससे ठीक पहले के रंगमंच-निर्देश से खुलता है। यहाँ कोष्ठक की एक पंक्ति — “(बाहर से कोई दरवाजा खटखटाता है।)” — पूरे वाक्य का अर्थ तय कर देती है।
प्र5.
5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है? • संवाद • कथा • वर्णन • मंचन
उत्तर

तारा (★) संवाद पर। मंचन को भी तर्क के साथ चुना जा सकता है।

विकल्पसही / ग़लतकारण
संवादसही ★इस एकांकी में लेखक कहीं भी अपनी ओर से कहानी नहीं सुनाता। हम जो कुछ जानते हैं — गरमी, गरीबी, पड़ोसी की कड़वाहट, मेहमानों का झूठ — सब पात्रों के मुँह से जानते हैं। पुस्तक स्वयं कहती है, “एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।”
कथाग़लतकथा तो कहानी, उपन्यास और आत्मकथा में भी होती है। इसलिए कथा नाटक की पहचान नहीं बन सकती।
वर्णनग़लतवर्णन गद्य की हर विधा में मिलता है। नाटक में तो वर्णन घटकर केवल कोष्ठक के छोटे-छोटे निर्देशों में सिमट जाता है।
मंचनतर्क सहित सही ★नाटक लिखा ही मंच के लिए जाता है — इसीलिए इसमें स्थान, वेशभूषा, प्रवेश-प्रस्थान और ‘यवनिका’ तक के निर्देश दिए जाते हैं। पर मंचन प्रस्तुति है, रचना नहीं; इसलिए पहला उत्तर अधिक सटीक है।
परख कैसे करें: जिस तत्व को हटा देने पर रचना नाटक रह ही न जाए, वही उसका मुख्य तत्व है। ‘नए मेहमान’ में से संवाद हटा दीजिए — कुछ बचेगा ही नहीं। कथा या वर्णन हटा दीजिए — नाटक फिर भी खड़ा रहेगा।
प्र6.
(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का काम है। चर्चा में केवल यह न बताइए कि आपने क्या चुना, बल्कि यह बताइए कि एकांकी की किस पंक्ति ने आपको वह चुनने पर मजबूर किया।

चर्चा का ढाँचा: हर उत्तर के लिए तीन बातें कहिए — (1) मैंने यह विकल्प चुना, (2) इसका आधार यह संवाद या यह रंगमंच-निर्देश है, (3) दूसरा विकल्प मुझे इसलिए कमजोर लगा।

नमूना उत्तर: “प्रश्न 3 में मैंने तीन विकल्प चुने। मेरा आधार रेवती के अपने वाक्य हैं — ‘पिछले पंद्रह दिन से दर्द के मारे सिर फट रहा है’ और ‘मैं ही जानती हूँ जैसे रोटी बनाती हूँ।’ चौथा विकल्प मैंने इसलिए छोड़ दिया क्योंकि एकांकी के अंत में वही रेवती अपने भाई के लिए खुशी-खुशी खाना बनाने उठ जाती है। अगर उसे मेहमान ही नापसंद होते, तो भाई के लिए भी नापसंद होते।”

इस गतिविधि का उद्देश्य: बहुविकल्पी प्रश्नों में एक से अधिक उत्तर तभी सही हो सकते हैं जब हर उत्तर के पीछे पाठ का प्रमाण हो। चर्चा में आप देखेंगे कि जिनके पास प्रमाण है, उनका उत्तर टिकता है; जिन्होंने अनुमान से चुना, उनका नहीं। साहित्य में राय अलग हो सकती है, पर आधार चाहिए ही।
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