तारा (★) तीन विकल्पों पर लगेगा — अतिथियों की सेवा करने के कारण, किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण और आज्ञाकारिता के भाव के कारण।
यह बात नन्हेमल तब कहता है जब प्रमोद कहीं से बरफ का ठंडा पानी ढूँढ़ लाता है और दोनों गट-गट पीकर तृप्त हो जाते हैं — “कितने सीधे लड़के हैं।” और बाबूलाल तुरंत जोड़ता है — “शहर के हैं न!”
| विकल्प | सही / ग़लत | पाठ से आधार |
|---|---|---|
| अतिथियों की सेवा करने के कारण | सही ★ | प्रमोद बरफ का पानी लाता है, किरण पंखा तेज करती है — बिना किसी शिकायत के। |
| किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण | सही ★ | बड़े लोग बार-बार पूछते हैं “आप कहाँ से आए हैं?”, पर बच्चे कुछ नहीं पूछते। नाम पूछे जाने पर बस “प्रमोद।” “किरण।” कहकर चुप हो जाते हैं। |
| आज्ञाकारिता के भाव के कारण | सही ★ | “ज़रा कुर्सी इधर खिसका दो”, “पंखा तेज कर देना, किरण” — हर आदेश तुरंत माना जाता है। |
| गरमी को चुपचाप सहने के कारण | ग़लत | गरमी तो घर का हर व्यक्ति सह रहा है। यह बात नन्हेमल ने बच्चों के व्यवहार पर कही है, गरमी सहने पर नहीं। |