मल्हार अध्याय 7 मत बाँधो के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

कविता का मूल स्वर एक निषेधात्मक प्रार्थना है — ‘न काटो’, ‘मत बाँधो’, ‘मत रोको’। कवयित्री कुछ माँगती नहीं, केवल इतना कहती हैं कि सपनों के रास्ते में मत खड़े हो जाइए। पहले चार उदाहरण आते हैं — सौरभ (जो उड़कर लौटता नहीं), बीज (जो गिरकर उड़ नहीं पाता), अग्नि (जो धरती पर ही जलती है) और धूम (जो केवल ऊपर उठता है)। हर उदाहरण में गति एक ही दिशा की है। सपना इन सबसे अलग है, क्योंकि उसमें दोनों गतियाँ हैं — आरोहण (ऊपर उठना, कल्पना बनना) और अवरोहण (लौटकर आँखों में, यानी व्यवहार में उतरना)। यही कविता का केंद्रीय विचार है। मुक्त सपना तारों तक जाकर लौटता है तो मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेता आता है, और धरती को ‘स्वर्ग बनाने का शिल्प’ सिखा देता है — अर्थात् स्वतंत्र कल्पना ही समाज को सुंदर बनाने की कारीगरी देती है। कविता की भाषा में तत्सम शब्द (सौरभ, नभ, गगन, अग्नि, धूम, आरोहण, अवरोहण, विचरण, दीप्ति,

  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. सोच-विचार के लिए
  5. शीर्षक
  6. अनुमान और कल्पना से
  7. कविता की रचना
  8. शब्दों की बात
  9. काल परिवर्तन
  10. शब्दकोश से
  11. आपकी बात
  12. चर्चा-परिचर्चा
  13. सृजन
  14. खोया-पाया
  15. वाद-विवाद
  16. देखना-सुनना-समझना…
  17. आपदा प्रबंधन
  18. शिल्प
  19. झरोखे से / साझी समझ
  20. खोजबीन के लिए
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