मल्हार अध्याय 7 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं? • सपने मात्र कल्पनाएँ हैं • सपनों को भूल जाना चाहिए • सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए • सपने देखना अच्छी बात है
उत्तर

★ सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए — यही मुख्य भाव है। ★ सपने देखना अच्छी बात है भी लिया जा सकता है, पर वह इस कविता का निष्कर्ष है, केंद्र नहीं।

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!

कविता की पहली और आख़िरी दोनों पंक्तियाँ यही हैं। बीच की हर पंक्ति भी किसी न किसी रूप में यही कहती है — मत रोको, मत बाँधो, न काटो। कवयित्री यह नहीं समझा रहीं कि सपने क्या होते हैं; वे यह कह रही हैं कि सपनों को खुला छोड़ दिया जाए

बाक़ी विकल्प क्यों नहीं: ‘सपने मात्र कल्पनाएँ हैं’ कविता के ठीक विपरीत है — कविता तो कहती है कि सपना ‘उड़कर आँखों में आता है’, यानी कल्पना से निकलकर सच बनता है। ‘सपनों को भूल जाना चाहिए’ भी उलटी बात है; कविता उन्हें बचाने की प्रार्थना है।
प्र2.
2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है? • प्रेम की • शिक्षा की • सपनों की • अधिकारों की
उत्तर

★ सपनों की।

पूरी कविता में जिसे ‘इसका’, ‘इसको’, ‘यह’ कहा गया है, वह सपना ही है — ‘इसका आरोहण मत रोको’, ‘धरती से इसको मत बाँधो!’। कवयित्री एक-एक करके वे सब बंधन गिनाती हैं जो सपने पर लगाए जा सकते हैं — पंख काटना, गति बाँधना, ऊपर जाने से रोकना, धरती से बाँधना — और हर बार मना करती हैं।

ध्यान दीजिए: कविता का असर आगे चलकर शिक्षा और अधिकारों तक पहुँचता है, क्योंकि सपने बच्चों के ही होते हैं और उन्हें रोकने वाले बड़े। पर कविता का सीधा विषय सपनों की स्वतंत्रता है।
प्र3.
3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है? • सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं • सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं • सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं • सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
उत्तर

★ सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं और ★ सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं — दोनों सही हैं। ★ सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं भी स्वीकार्य है।

‘पंख’ का चित्र कैसे काम करता है: कवयित्री ने सपने को पक्षी बना दिया है — यह रूपक है। पंख का काम केवल ऊपर उठाना नहीं, मनचाही दिशा में ले जाना भी है। इसीलिए ‘पंख काटना’ मुहावरे की तरह चुभता है: पंख कटे पक्षी की जान नहीं जाती, उसकी पहुँच चली जाती है। ठीक यही सपनों के साथ होता है — रोका गया सपना मरता नहीं, बस कहीं पहुँचना बंद कर देता है।

चौथा विकल्प (‘कोमल और अनेक प्रकार के’) पंख की बनावट की बात करता है, उसके काम की नहीं — इसलिए वह कविता के भाव से मेल नहीं खाता।

प्र4.
4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं? • जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो • जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो • जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो • जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
उत्तर

★ जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो और ★ जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों — ये दोनों उत्तर सही हैं।

कविता का ‘स्वर्ग’ मरने के बाद मिलने वाला कोई लोक नहीं है। ध्यान दीजिए कि वह बनाया जाने वाला है और उसका शिल्प भूमि को सिखाया जाना है — यानी यह स्वर्ग इसी धरती पर, मनुष्यों के हाथों बनना है।

क्यों: जो चीज़ हाथ से बनानी हो, वह मिलकर ही बनती है — इसीलिए सहयोग और सद्भाव ही उसका कच्चा माल हैं। धन-संपत्ति से ऐसा स्थान नहीं बनता, क्योंकि संपत्ति बाँटती है, जोड़ती नहीं। ‘शारीरिक कष्ट न हो’ केवल सुविधा की बात है; कविता सुविधा नहीं, संबंध की बात कर रही है।
प्र5.
5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है? • वह बहुत तेजी से उड़ सकता है • वह और गहरा हो सकता है • उसकी उड़ान रुक सकती है • वह बढ़कर पौधा बन सकता है
उत्तर

★ उसकी उड़ान रुक सकती है — कविता के संदर्भ में यही उत्तर है। ★ वह बढ़कर पौधा बन सकता है भी सही है, यदि आप बीज को प्रकृति के नियम से देखें।

बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?

कवयित्री यहाँ बीज को उदाहरण की तरह ला रही हैं। सौरभ केवल ऊपर जा सकता है, बीज केवल नीचे — दोनों की गति एक ही दिशा में बँधी है। इसीलिए कविता के भीतर बीज का अर्थ है — गिरा तो अब उड़ नहीं सकता।

दोनों उत्तर एक साथ कैसे सही हैं: धूल में गिरा बीज सचमुच पौधा बनता है, पर वह भी नीचे से ऊपर की एक ही यात्रा है — वह वापस बीज बनकर आकाश में नहीं उड़ता। सपना इसीलिए इन सबसे अलग है: वह ऊपर भी जाता है और लौटकर आँखों में भी आता है।
प्र6.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का काम है। चर्चा तब सार्थक होती है जब हर साथी अपना उत्तर कविता की किसी पंक्ति से जोड़कर बताए, केवल ‘मुझे ऐसा लगा’ कहकर न छोड़े।

चर्चा का ढाँचा —

  1. अपना चुना हुआ विकल्प बोलिए।
  2. कविता की वह पंक्ति पढ़िए जिससे वह विकल्प निकलता है।
  3. बताइए कि दूसरा विकल्प आपने क्यों छोड़ा।
  4. अंत में देखिए कि किन प्रश्नों में एक से अधिक उत्तर सचमुच बनते हैं।
नमूना उत्तर: “प्रश्न 3 में मैंने ‘सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं’ चुना, क्योंकि कविता में सपना ‘मुक्त गगन में विचरण’ करता है — यानी वह केवल ऊपर नहीं जाता, घूमता भी है। मेरे साथी ने ‘सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं’ चुना और उसका आधार ‘नभ तक जाने से मत रोको’ पंक्ति थी। दोनों पंक्तियाँ कविता में हैं, इसलिए हमने तय किया कि दोनों उत्तर सही हैं।”
यह गतिविधि क्यों दी गई है: बहुविकल्पी प्रश्न में एक उत्तर पर टिक लगाकर काम ख़त्म हो जाता है। चर्चा करने पर पता चलता है कि कविता में एक ही पंक्ति के कई पाठ संभव हैं — और अपना पाठ प्रमाण देकर सिद्ध करना ही साहित्य पढ़ना है।
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