★ सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए — यही मुख्य भाव है। ★ सपने देखना अच्छी बात है भी लिया जा सकता है, पर वह इस कविता का निष्कर्ष है, केंद्र नहीं।
इन सपनों की गति मत बाँधो!
कविता की पहली और आख़िरी दोनों पंक्तियाँ यही हैं। बीच की हर पंक्ति भी किसी न किसी रूप में यही कहती है — मत रोको, मत बाँधो, न काटो। कवयित्री यह नहीं समझा रहीं कि सपने क्या होते हैं; वे यह कह रही हैं कि सपनों को खुला छोड़ दिया जाए।