भावार्थ — फूल की सुगंध हवा में उड़कर आकाश में घुल जाती है; उड़ जाने के बाद वह फिर उसी फूल में लौटकर नहीं आती। दूसरी ओर बीज मिट्टी में गिर पड़ता है; एक बार गिर जाने के बाद वह कभी आकाश में उड़ नहीं सकता।
बीज — केवल नीचे गिर सकता है, उड़ नहीं सकता।
दोनों की गति एकतरफ़ा है।
भाषा की बात — दोनों वाक्य प्रश्न के रूप में हैं, पर उत्तर माँगते नहीं। ‘लौट कहाँ आता है?’ और ‘कब उड़ पाता है?’ का अर्थ है ‘लौटता ही नहीं’, ‘उड़ पाता ही नहीं’। यह प्रश्नालंकार (काव्य-प्रश्न) है — प्रश्न पूछकर उत्तर मनवा लेने की युक्ति। साथ ही ‘सौरभ… नभ’ और ‘बीज… धूलि’ में ऊपर-नीचे का विरोधाभासी चित्र बनता है, जो अगली ही पंक्तियों में ‘आरोहण–अवरोहण’ बनकर लौटता है।