प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से मिलाइए।
स्तंभ 1 — 1. इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो! 2. सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है! 3. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! 4. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! 5. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!
स्तंभ 2 — 1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। 2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। 3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। 4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। 5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है।
उत्तर
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | सही मिलान | क्यों |
|---|---|---|
| 1. इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो! | 3 | दोनों जगह पंख का ही चित्र है — पंख कटा पक्षी और बाधित सपना, दोनों की पहुँच ख़त्म हो जाती है। |
| 2. सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है! | 5 | ‘दोनों ही गति’ का अर्थ ही आरोहण और अवरोहण है — सपना विचार बनकर उठता है और व्यवहार बनकर उतरता है। |
| 3. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! | 1 | यहाँ दोनों गतियों में बाधा न डालने की सीधी प्रार्थना है; भाव में भी ‘बाधा न डालें’ ही कहा गया है। |
| 4. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! | 2 | ‘नभ तक जाने’ = ऊँचाइयों तक जाना, ‘धरती से बाँधना’ = नीचे जकड़ रखना। भाव लगभग शब्दशः वही है। |
| 5. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! | 4 | ‘स्वर्ग’ यानी सुंदर, समृद्ध, शांतिपूर्ण समाज; उसे बनाने का शिल्प स्वतंत्र और रचनात्मक विचार से ही मिलता है। |
संक्षेप में — 1→3, 2→5, 3→1, 4→2, 5→4
मिलान की कुंजी: हर बार वही जोड़ी बनती है जिसमें भाव-पक्ष पंक्ति के मुख्य शब्द को खोलकर समझा रहा हो — ‘पंख’ के साथ पक्षी, ‘दोनों गति’ के साथ आरोहण-अवरोहण की व्याख्या, ‘नभ/धरती’ के साथ ऊँचाई-जकड़न, और ‘स्वर्ग/शिल्प’ के साथ सुंदर समाज।