हाँ, इस शर्त के साथ कि लौटने के बाद उस पर काम किया जाए। कविता की पंक्ति यही कहती है — सपना ऊपर उड़ता है, पर टिकता तब है जब वह ‘आँखों में’ आ जाता है, यानी जब आँखें रोज़ उसे देखने लगती हैं।
‘आँखों में आना’ का अर्थ: यह मुहावरा दो काम एक साथ करता है। पहला — जो चीज़ आँख के सामने रहती है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। दूसरा — आँख शरीर का वह हिस्सा है जिससे हम दुनिया को नापते हैं; सपना आँख में आ गया तो अब वह कल्पना नहीं, योजना है। इसीलिए कवयित्री ने ‘मन में आता है’ नहीं, ‘आँखों में आता है’ लिखा।
नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले के एक बड़े भैया राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेलना चाहते थे। पहले यह केवल बात थी। फिर उन्होंने अपने कमरे में एक तारीख़ लिखकर चिपका दी और रोज़ सुबह पाँच बजे मैदान जाने लगे। दो साल बाद वे राज्य की टीम में चुने गए। सपना पहले उड़ा था, पर वह उस दिन सच होना शुरू हुआ जिस दिन वह हर सुबह उनकी आँखों के सामने आ गया।”
दूसरा पक्ष भी लिखिए — हर सपना पूरा नहीं होता, और यह मान लेना भी ईमानदारी है। पर अधूरा रहा सपना भी बेकार नहीं जाता: वह रास्ता, अभ्यास और अनुभव छोड़ जाता है, जो किसी दूसरे काम में लग जाता है।