प्र1.
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर
पहले देखिए कि ‘मत बाँधो’ नाम इतना अच्छा क्यों है — यह कविता की टेक से लिया गया है, केवल दो शब्दों का है, और आदेश तथा प्रार्थना दोनों जैसा सुनाई देता है। नया शीर्षक चुनते समय यही तीन कसौटियाँ काम आएँगी: छोटा हो, कविता के केंद्रीय भाव से निकले, और कुछ बचा भी रहने दे।
| संभावित शीर्षक | किस पंक्ति/भाव से निकला | क्या पकड़ता है |
|---|---|---|
| सपनों के पंख | इन सपनों के पंख न काटो | कविता का सबसे मज़बूत बिंब |
| दोनों ही गति | सपनों में दोनों ही गति हैं | कविता का असली तर्क — आरोहण और अवरोहण |
| मुक्त गगन | मुक्त गगन में विचरण कर यह | स्वतंत्रता का भाव |
| स्वर्ग का शिल्प | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प | सपनों का सामाजिक उपयोग |
| लौटता हुआ सपना | उड़कर आँखों में आता है! | सपने का सच बनना |
नमूना उत्तर: “मैं इस कविता को ‘दोनों ही गति’ नाम दूँगा/दूँगी। ‘मत बाँधो’ बताता है कि क्या नहीं करना है, पर ‘दोनों ही गति’ बताता है कि सपना है क्या — वह चीज़ जो ऊपर भी जाती है और लौटकर आँखों में भी आती है। सौरभ, बीज, अग्नि और धूम के चारों उदाहरण इसी एक बात को सिद्ध करने के लिए आए हैं, इसलिए यही नाम कविता के केंद्र पर बैठता है।”
शीर्षक चुनने का नियम: अच्छा शीर्षक कविता का सारांश नहीं होता, उसका प्रवेश-द्वार होता है। ‘सपने अच्छे होते हैं’ जैसा नाम सब कुछ कहकर कविता पढ़ने की ज़रूरत ही ख़त्म कर देता है।