मल्हार अध्याय 6 एक टोकरी भर मिट्टी के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
कहानी बहुत छोटी है — मुश्किल से दो पृष्ठ — पर उसमें अन्याय, मोह, पश्चाताप और क्षमा, चारों आ जाते हैं। लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) का जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ; उनकी मातृभाषा मराठी थी और वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए। कथा-सूत्र — ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहता है; वृद्धा झोंपड़ी छोड़ने से मना करती है; ज़मींदार वकीलों की थैली गरम कर अदालत से कब्ज़ा कर लेता है और उसे निकाल देता है। मोड़ (टर्निंग पॉइंट) एक ही दृश्य में आता है — वृद्धा पोती के लिए एक टोकरी मिट्टी माँगती है और ज़मींदार से उसे उठवाना चाहती है। ज़मींदार पूरी ताकत लगाकर भी टोकरी एक हाथ भी ऊँची नहीं कर पाता । वृद्धा का प्रश्न ही कहानी का मर्म है — “आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” यहाँ भार शा
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- बदली कहानी
- ‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
- मुहावरे
- काल
- वचन की पहचान
- कहानी की रचना
- शब्दकोश का उपयोग
- भावों की पहचान
- वाक्य विस्तार
- संवाद फोन पर
- पोती की भावनाएँ
- आपकी बात
- न्याय और समता
- घर-घर की कहानी
- न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए