प्र1.
अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15–20 शब्द हो सकते हैं।
1. एक झोंपड़ी थी।
2. श्रीमान् टहल रहे थे।
3. वह खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई।
5. आगे बढ़े।
उत्तर
| छोटा वाक्य | विस्तार (लगभग 15–20 शब्द) | क्या जोड़ा गया |
|---|---|---|
| 1. एक झोंपड़ी थी। | किसी श्रीमान् ज़मींदार के आलीशान महल के ठीक पास मिट्टी और फूस की एक छोटी-सी पुरानी झोंपड़ी थी। | कहाँ थी, किसकी थी, किस चीज़ की बनी थी — और महल के पास रखकर वह विरोध भी आ गया जिस पर कहानी टिकी है। |
| 2. श्रीमान् टहल रहे थे। | एक दिन सवेरे श्रीमान् ज़मींदार उस छूटी हुई झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और नौकरों को काम बतला रहे थे। | कब, कहाँ, और साथ में क्या कर रहे थे — ‘नौकरों को काम बतला रहे थे’ से उनका रुतबा भी दिख गया। |
| 3. वह खाने लगेगी। | दादी को पूरा भरोसा था कि अपने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर उसकी रूठी हुई पोती फिर से रोटी खाने लगेगी। | कौन, किसके भरोसे, किस शर्त पर — पूरी घटना एक वाक्य में आ गई। |
| 4. वृद्धा भीतर गई। | आँसू भरी आँखों और काँपते कदमों से वृद्धा अपनी छूटी हुई झोंपड़ी के भीतर पुरानी यादों के बीच गई। | किस दशा में, किसके भीतर, किस भाव के साथ — भाव जुड़ते ही वाक्य दृश्य बन गया। |
| 5. आगे बढ़े। | किसी नौकर से न कहकर ज़मींदार साहब स्वयं अपने हाथों से मिट्टी भरी वह भारी टोकरी उठाने के लिए आगे बढ़े। | कौन, क्यों, किसके लिए — और ‘किसी नौकर से न कहकर’ जोड़ते ही कहानी का मोड़ इसी वाक्य में आ गया। |
विस्तार करने का तरीका: छोटे वाक्य से बस पाँच प्रश्न पूछिए — कौन? क्या? कहाँ? कब? कैसे या क्यों? हर उत्तर एक विशेषण, क्रिया-विशेषण या वाक्यांश बनकर जुड़ जाएगा। पर एक चेतावनी: विस्तार का अर्थ केवल लंबा करना नहीं है। जो शब्द कोई नई जानकारी या नया भाव न जोड़े, वह वाक्य को कमज़ोर करता है। पाठ के उदाहरण को देखिए — ‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची’ — यहाँ हर जोड़ा हुआ शब्द उसकी उम्र, थकान और बेबसी बता रहा है।
ध्यान रखिए: प्रश्न कहता है ‘कहानी को ध्यान में रखते हुए’ — इसलिए विस्तार में जो जोड़ें वह कहानी से मेल खाए। ‘वृद्धा हँसती हुई भीतर गई’ लिखना व्याकरण से ठीक है, पर कहानी से गलत।