प्र1.
“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…” कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए—
(भाववाचक संज्ञाएँ: ममता/स्नेह · दुख/पीड़ा · विनम्रता/विनय · अहंकार/घमंड · बोध/आत्मज्ञान · आस्था/विश्वास · जुड़ाव/मोह · करुणा/दया · क्रूरता/अन्याय · लज्जा/पछतावा)
उत्तर
| क्रम | पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा | पहचान कहाँ से |
|---|---|---|---|
| 1. | वह लज्जित होकर कहने लगे— ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | लज्जा / पछतावा | ‘लज्जित’ शब्द ही सीधा संकेत है; नौकरों के सामने हार का शर्म। |
| 2. | वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। | बोध / आत्मज्ञान | ‘आँखें खुलना’ मुहावरा है — भ्रम टूटना, सच दिखाई देना। |
| 3. | उनके मन में कुछ दया आ गई। | करुणा / दया | दूसरे के दुख से मन का पिघलना ही करुणा है। |
| 4. | इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | आस्था / विश्वास | ‘भरोसा है’ — जो अभी हुआ नहीं, उस पर यकीन। |
| 5. | महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | विनम्रता / विनय | ‘क्षमा करें’ और ‘विनती’ — दोनों झुककर बोले गए शब्द। |
| 6. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | ममता / स्नेह | दादी और पोती का रिश्ता — बड़े का छोटे के प्रति प्रेम। |
| 7. | ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | अहंकार / घमंड | ‘मद’ = नशा, ‘गर्वित’ = घमंड से भरा हुआ। |
| 8. | उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | जुड़ाव / मोह | ‘मन लग जाना’ और मरने तक न छोड़ना — यह जगह से बँध जाना है। |
| 9. | जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | दुख / पीड़ा | ‘मारे दुख के’ और ‘फूट-फूट कर रोना’ — शब्द स्वयं बता रहे हैं। |
| 10. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | क्रूरता / अन्याय | रिश्वत देकर एक अनाथ बुढ़िया का घर छीनना — यह निर्दयता भी है और अन्याय भी। |
भाववाचक संज्ञा क्या होती है: जो संज्ञा किसी भाव, दशा या गुण का नाम हो — दया, अहंकार, लज्जा, विश्वास। इन्हें छुआ नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। ध्यान दीजिए कि ये अक्सर विशेषण या क्रिया से बनती हैं: लज्जित → लज्जा, दयालु → दया, विनम्र → विनम्रता, गर्वित → गर्व। इसी सूत्र से आप कोई भी नई भाववाचक संज्ञा बना सकते हैं।
पूरी सूची एक साथ पढ़िए: अहंकार → क्रूरता → करुणा → लज्जा → बोध → पश्चाताप। यह केवल दस पंक्तियों की सूची नहीं, ज़मींदार के मन की पूरी यात्रा है — और उसके आर-पार वृद्धा के भाव चलते हैं: मोह, दुख, ममता, विनय, विश्वास।