प्र1.
नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए—
1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए — धनी, शोभायुक्त, शोभावान्, संपत्तिशाली, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द।
2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। — अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची।
3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। — राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह।
4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। — काल, बहुत अधिक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल।
5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। — सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला।
उत्तर
| शब्द | घेरा किस अर्थ पर | वहीं क्यों |
|---|---|---|
| श्रीमान् | पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द | वाक्य में ‘श्रीमान्’ किसी की संपत्ति नहीं बता रहा, बल्कि ज़मींदार को संबोधित कर रहा है — जैसे ‘श्रीमान् ने आज्ञा दे दी’। कहानी में लेखक इसे व्यंग्य के साथ बरतता है: जो आदमी ‘श्रीमान्’ कहलाता है, उसका काम श्रीमानों जैसा नहीं है। |
| कन्या | लड़की | यहाँ पाँच बरस की बच्ची की बात है। ‘अविवाहित लड़की’ शब्दकोश में सही है, पर पाँच साल की बच्ची के लिए वह अर्थ अटपटा है; और ‘एक राशि का नाम’ या ‘बड़ी इलायची’ का यहाँ कोई संबंध नहीं। |
| महल | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद | वाक्य में महल का ‘अहाता’ है, यानी वह एक इमारत है — इसलिए ‘पत्नी’ या ‘अंतःपुर’ जैसे अर्थ यहाँ नहीं चलेंगे। यही अर्थ झोंपड़ी के ठीक उलट खड़ा होकर कहानी का विरोध बनाता है। |
| ज़माना | बहुत अधिक समय | ‘कई ज़माने से वहीं बसी थी’ — यानी बहुत लंबे समय से, पीढ़ियों से। ‘संसार/जगत’ अर्थ दूसरे प्रयोग में चलता है (‘ज़माना क्या कहेगा’), यहाँ नहीं। |
| आधार | सहारा | ‘एकमात्र आधार थी’ — पोती वृद्धा का सहारा थी। ‘नींव’, ‘बरतन’, ‘बाँध’ जैसे अर्थ भौतिक चीज़ों के लिए हैं; यहाँ बात भावनात्मक और व्यावहारिक सहारे की है। |
शब्दकोश इस्तेमाल करने का नियम: शब्दकोश एक शब्द के कई अर्थ देता है, पर सही अर्थ शब्दकोश तय नहीं करता — वाक्य तय करता है। इसलिए पहले वाक्य पढ़िए, फिर देखिए कि उसमें वह शब्द किसके बारे में बात कर रहा है — व्यक्ति के, वस्तु के, समय के या भाव के। फिर उसी कोटि का अर्थ चुनिए। ‘ज़माना’ यहाँ समय बता रहा है, इसलिए समय वाला अर्थ ही चलेगा।
करके देखिए: ‘आधार’ के बाकी अर्थ भी सही वाक्यों में डालकर देखिए — “पुल का आधार मज़बूत है” (नींव), “इस नाटक का मुख्य पात्र…” यों करने से एक ही शब्द के कई चेहरे याद हो जाते हैं।