प्र1.
“यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो…”” इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर
पहले उसी उदाहरण को समझ लीजिए जो पाठ ने दिया है। ‘…’ लगाकर लेखक ने वृद्धा की बात बीच में रोक दी। इससे पढ़ने वाला एक क्षण रुककर सोचता है — अब यह क्या कहेगी? — और अगली पंक्ति की चोट दुगुनी हो जाती है।
कहानी की अन्य विशेषताएँ (सूची) —
- प्रतीक का प्रयोग — ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ सिर्फ़ मिट्टी नहीं, छीने गए घर और अन्याय के भार का प्रतीक है। शीर्षक भी वही प्रतीक है।
- दिखाना, बताना नहीं — लेखक कहीं नहीं लिखता कि ‘अन्याय का बोझ भारी होता है’। वह टोकरी उठवाकर दिखा देता है।
- मुहावरों से चरित्र गढ़ना — ‘बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर’ — दो मुहावरों में पूरी बेईमानी आ गई।
- छोटे, तेज़ वाक्य — ‘बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी।’ बड़ी त्रासदी एक पंक्ति में।
- भाषा का मेल — तत्सम शब्द (मृतप्राय, निष्फल, कृतकर्म, पश्चाताप) और उर्दू-फ़ारसी शब्द (ज़मींदार, अहाता, अदालत, कब्ज़ा) साथ-साथ चलते हैं।
- व्यंग्य — छीनने वाले को लगातार ‘श्रीमान्’ और ‘महाराज’ कहा गया है — आदर के शब्दों से बेइज़्ज़ती।
- दृश्य पर टिका मोड़ — पूरी कहानी एक ही दृश्य पर घूम जाती है — टोकरी का न उठना।
- प्रश्न पर छोड़ना — ‘उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।’ उपदेश नहीं, प्रश्न।
- संक्षिप्तता — पूरी कहानी दो पृष्ठों में — न कोई अतिरिक्त पात्र, न कोई अतिरिक्त घटना।