प्र1.
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
उत्तर
अच्छे संवाद में क्या होना चाहिए — दोनों की भाषा अलग हो (ज़मींदार की भाषा रौबदार और समझाने वाली, बच्ची की भाषा सीधी और छोटी), बातचीत आगे बढ़े, और अंत में कुछ बदले — या तो कोई मान जाए या कोई सोचने लगे।
नमूना उत्तर:
ज़मींदार — हैलो… बेटी, मैं बोल रहा हूँ, तुम्हारे गाँव वाला… जिनका बड़ा घर है।
पोती — जी, मैं जानती हूँ। आपने ही हमारा घर लिया है।
ज़मींदार — (ज़रा रुककर) देखो, मैंने तुम्हारी दादी से सब बात कर ली है। तुम खाना क्यों नहीं खा रही? इस उम्र में खाना नहीं खाओगी तो बीमार पड़ जाओगी।
पोती — मुझे भूख लगती है, अंकल। पर वहाँ रोटी अच्छी नहीं लगती।
ज़मींदार — रोटी तो वही आटा, वही चूल्हा… स्वाद कैसे बदल जाएगा?
पोती — चूल्हा वही नहीं है। हमारा चूल्हा हमारे घर की मिट्टी का था। उस पर माँ रोटी बनाती थी।
ज़मींदार — (चुप) …
पोती — अंकल, आपके घर में आपकी माँ की कोई चीज़ है?
ज़मींदार — हाँ… उनकी एक चरखी है, लोहे की। मैं उसे किसी को छूने नहीं देता।
पोती — कोई उसे उठा ले जाए तो?
ज़मींदार — (लंबी साँस) बेटी, आज खाना खा लो। कल सवेरे मैं खुद आऊँगा। और शायद… खाली हाथ नहीं आऊँगा।
ज़मींदार — हैलो… बेटी, मैं बोल रहा हूँ, तुम्हारे गाँव वाला… जिनका बड़ा घर है।
पोती — जी, मैं जानती हूँ। आपने ही हमारा घर लिया है।
ज़मींदार — (ज़रा रुककर) देखो, मैंने तुम्हारी दादी से सब बात कर ली है। तुम खाना क्यों नहीं खा रही? इस उम्र में खाना नहीं खाओगी तो बीमार पड़ जाओगी।
पोती — मुझे भूख लगती है, अंकल। पर वहाँ रोटी अच्छी नहीं लगती।
ज़मींदार — रोटी तो वही आटा, वही चूल्हा… स्वाद कैसे बदल जाएगा?
पोती — चूल्हा वही नहीं है। हमारा चूल्हा हमारे घर की मिट्टी का था। उस पर माँ रोटी बनाती थी।
ज़मींदार — (चुप) …
पोती — अंकल, आपके घर में आपकी माँ की कोई चीज़ है?
ज़मींदार — हाँ… उनकी एक चरखी है, लोहे की। मैं उसे किसी को छूने नहीं देता।
पोती — कोई उसे उठा ले जाए तो?
ज़मींदार — (लंबी साँस) बेटी, आज खाना खा लो। कल सवेरे मैं खुद आऊँगा। और शायद… खाली हाथ नहीं आऊँगा।
यह संवाद क्यों काम करता है: बच्ची कहीं भी झगड़ती नहीं। वह सिर्फ़ एक प्रश्न पूछती है जिससे ज़मींदार को अपनी बात अपने ऊपर लौटती हुई दिखती है — ठीक वैसे ही जैसे मूल कहानी में दादी ने टोकरी से किया था। कहानी की चाल वही रखिए, बस साधन बदल दीजिए।