मल्हार अध्याय 6 पोती की भावनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर

यह औपचारिक पत्र है, इसलिए इसका ढाँचा तय है — सेवा में / विषय / संबोधन / विषय-वस्तु / प्रार्थना / भवदीय। भाषा विनम्र रखिए, पर बात साफ़ और तथ्यों के साथ कहिए। भावुक बातें एक-दो पंक्ति में समेट दीजिए; अधिकारी को तथ्य और माँग चाहिए।

नमूना उत्तर:

सेवा में,
श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय,
जिला — ………………

विषय — पैतृक झोंपड़ी पर किए गए अवैध कब्ज़े की शिकायत तथा उसे वापस दिलाने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं ……… गाँव की निवासी हूँ और अपनी दादी के साथ रहती हूँ। मेरे माता-पिता और दादा का देहांत हो चुका है। हमारी छोटी-सी झोंपड़ी हमारे परिवार के पास कई पीढ़ियों से थी और मेरा जन्म भी उसी में हुआ है।

हमारे पड़ोस के ज़मींदार महोदय अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने पहले हमसे झोंपड़ी खाली करने को कहा और फिर वकीलों की सहायता से अदालत के द्वारा उस पर कब्ज़ा कर लिया। मेरी दादी न पढ़ी-लिखी हैं और न ही उनके पास मुकदमा लड़ने के साधन थे, इसलिए हमारा पक्ष कहीं रखा ही नहीं जा सका। आज हम दूसरों के आसरे रह रहे हैं।

महोदय, वह केवल एक झोंपड़ी नहीं है। उसी घर में मेरी माँ ने अंतिम साँस ली थी। मैं वहीं लौटना चाहती हूँ।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस मामले की जाँच कराई जाए, संबंधित कागज़ात की पड़ताल की जाए और हमें हमारी झोंपड़ी वापस दिलाई जाए। साथ ही कृपया हमें निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि हम वकील का व्यय नहीं उठा सकते।

आपकी बड़ी कृपा होगी।

भवदीया,
……………… (नाम)
ग्राम — ………, दिनांक — ………
इस पत्र में ध्यान देने योग्य बातें: (1) विषय एक पंक्ति में पूरी बात कह देता है; (2) घटना क्रम से बताई गई है — पहले क्या हुआ, फिर क्या; (3) माँग साफ़ है और दो हिस्सों में है — जाँच और कानूनी सहायता; (4) कहीं भी ज़मींदार को गाली नहीं दी गई। औपचारिक पत्र में क्रोध नहीं, प्रमाण काम आता है।
प्र2.
(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए— मेरी दैनंदिनी 2 मई — आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया…
उत्तर

डायरी की भाषा पत्र से बिलकुल अलग होती है — वह अपने आप से कही गई बात है। इसलिए उसमें दिनांक, ‘मैं’, छोटे-छोटे वाक्य और अधूरी बातें भी चलती हैं। कहानी की घटनाओं का क्रम बनाए रखिए।

नमूना उत्तर:

मेरी दैनंदिनी

2 मई — आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया कि बड़े घर वाले साहब हमारी झोंपड़ी माँग रहे हैं। मैंने कहा — दे मत देना। दादी कुछ बोलीं नहीं, बस मेरे सिर पर हाथ रखकर बैठी रहीं।

19 मई — कागज़ आ गया है। दादी उसे पढ़ नहीं सकतीं, फिर भी देर तक देखती रहीं। आज हमें झोंपड़ी छोड़नी पड़ी। जाते समय मैंने दरवाज़े की चौखट को छू लिया था। किसी ने देखा नहीं।

20 मई — यह घर नहीं है। यह किसी और का बरामदा है। रात-भर छत की तरफ़ देखती रही। हमारी छत पर एक जगह से चाँद दिखता था।

21 मई — दादी रोटी लाईं। मैंने नहीं खाई। उन्होंने डाँटा, फिर रोने लगीं। मुझे बुरा लगा, पर मैंने फिर भी नहीं खाई। मुझे अपने घर की रोटी चाहिए।

23 मई — आज दादी सुबह ही निकल गईं। हाथ में हमारी पुरानी टोकरी थी। मैंने पूछा — कहाँ? बोलीं, “तेरे लिए चूल्हा लाने।” मुझे समझ नहीं आया।

23 मई, रात — दादी लौटीं तो टोकरी उनके सिर पर नहीं थी। पर उनका चेहरा… ऐसा चेहरा मैंने बहुत दिनों से नहीं देखा था। उन्होंने कहा कि साहब ने माफ़ी माँगी है और हमारी झोंपड़ी लौटा दी है। मैंने पूछा — कैसे? दादी हँसकर बोलीं, “एक टोकरी मिट्टी ने कह दिया, जो मैं सालों में नहीं कह पाई।”

24 मई — आज हमने अपने चूल्हे पर रोटी बनाई। मैंने तीन खाईं। दादी देखती रहीं।
अच्छी डायरी कैसे बनती है: बड़ी घटना को छोटी चीज़ से बताइए — छत का वह छेद जिससे चाँद दिखता था, चौखट को छूना, तीन रोटियाँ। कहानी में भी लेखक ने यही किया है: पूरा अन्याय एक टोकरी मिट्टी में समेट दिया। भावना ‘मैं बहुत दुखी हूँ’ लिखने से नहीं आती, ब्योरे से आती है।
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