यह अपने ऊपर लौटकर देखने वाला प्रश्न है। ईमानदारी से लिखिए — इस तरह के उत्तर में अपनी गलती छिपाना उत्तर को बेकार कर देता है।
उत्तर का ढाँचा — क्या किया → क्यों किया (गुस्सा या अहंकार) → कब समझ आया कि गलत था → फिर क्या किया → अब क्या सीखा।
नमूना उत्तर: “एक बार खेल में मेरे छोटे भाई ने मुझे हरा दिया। सबके सामने हारना मुझे बुरा लगा और गुस्से में मैंने उसका बनाया हुआ मिट्टी का किला तोड़ दिया, जिस पर वह दो दिन से मेहनत कर रहा था। वह रोया नहीं, बस चुपचाप बैठा रहा — और यही मुझे सबसे ज़्यादा चुभा। रात को मैंने उससे माफ़ी माँगी और अगले दिन उसके साथ बैठकर वैसा ही किला दोबारा बनाया, पहले से बड़ा। उस दिन मैंने सीखा कि गुस्सा कुछ ही पलों का होता है, पर उसमें किया गया काम बहुत दिन तक याद रहता है। और यह भी कि टूटी हुई चीज़ बनाई जा सकती है, बशर्ते आप उसे बनाने में खुद हाथ लगाएँ।”
कहानी की याद: ज़मींदार ने भी अहंकार में एक घर छीना और बाद में वही घर लौटाया। ध्यान दीजिए — भरपाई उसने अपने हाथ से की, नौकरों से नहीं करवाई। गलती सुधारने में भी वही अपने हाथ का काम चाहिए जो टोकरी उठाने में चाहिए था।