मल्हार अध्याय 6 न्याय और समता

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया। (क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
उत्तर

इस प्रश्न में तीन रास्ते खुले हैं — देखा (अपने आस-पास), पढ़ा (अख़बार, पुस्तक) या सुना (बड़ों से)। कोई एक चुनिए और घटना क्रम से बताइए: क्या हुआ, किसके साथ हुआ, किसने किया, और आगे क्या हुआ।

नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले में एक बुज़ुर्ग दंपती के मकान के आगे की खाली ज़मीन पर पड़ोसी ने धीरे-धीरे सामान रखना शुरू किया, फिर दीवार खड़ी कर दी। बुज़ुर्ग दंपती ने मना किया तो उन्हें डराया गया कि कागज़ हमारे पास हैं। वे थाने जाने से घबराते थे। बाद में मोहल्ले के कुछ लोगों ने मिलकर बात की और नगरपालिका में शिकायत दर्ज कराई। नाप-जोख हुई तो दीवार हटानी पड़ी। मुझे तब लगा कि उस कहानी की वृद्धा और ये दंपती एक जैसे हैं — दोनों के पास हक़ था, पर आवाज़ नहीं थी। फ़र्क सिर्फ़ इतना रहा कि यहाँ मोहल्ला साथ खड़ा हो गया।”
ध्यान रखने की बात: ऐसे उत्तर में किसी असली व्यक्ति का नाम मत लिखिए और अपनी ओर से किसी को दोषी घोषित मत कीजिए। घटना बताइए, नाम नहीं।
प्र2.
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर
आप (एक विद्यार्थी) क्या कर सकते हैंआस-पास के लोग क्या कर सकते हैं
घर के बड़ों को तुरंत बताइए — अकेले किसी से भिड़िए मत।पीड़ित के साथ जाकर बात कीजिए; अकेला आदमी डरता है, चार लोग हों तो नहीं।
जो हुआ उसे तारीख़ के साथ लिख लीजिए — बाद में यही सबसे काम की चीज़ बनती है।कागज़ात देखने-समझने में मदद कीजिए; जो पढ़ना नहीं जानता, उसके लिए पढ़ना भी सहायता है।
पीड़ित का साथ दीजिए — बात सुनिए, उसे अकेला मत छोड़िए।पंचायत, नगरपालिका, थाने या जनसुनवाई तक शिकायत ले जाने में साथ चलिए।
विद्यालय में शिक्षक या प्रधानाचार्य को बताइए; वे सही जगह तक बात पहुँचा सकते हैं।निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दीजिए — गरीब, वृद्ध और स्त्रियों को यह अधिकार से मिलती है।
अफ़वाह मत फैलाइए और सोशल मीडिया पर किसी का नाम मत डालिए।दोनों पक्षों की बात सुनकर पहले आपस में सुलझाने का प्रयास कीजिए।
कहानी से सबसे बड़ा सबक: वृद्धा हारी इसलिए नहीं कि वह कमज़ोर थी, बल्कि इसलिए कि वह अकेली थी और उसे रास्ता मालूम नहीं था। कहानी में एक भी पड़ोसी उसके साथ खड़ा नहीं होता — ‘पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी’, बस इतना लिखा है। अन्याय के समय चुप रह जाना भी अन्याय में हिस्सा है।
प्र3.
(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर

यह कथन बिलकुल सही है, और इसी कहानी से इसका सबसे अच्छा प्रमाण मिलता है।

कहानी में दो तरह की शक्ति आमने-सामने हैं —

ज़मींदार की शक्तिवृद्धा की शक्ति
धन, महल, नौकर, वकील, अदालत का आदेशकेवल एक टोकरी, एक तर्क और एक प्रश्न
डर पैदा करती है — “उसे यहाँ से हटा दो”सोचने पर मजबूर करती है — “आप ही इस बात पर विचार कीजिए”
झोंपड़ी दिला देती है, पर चैन नहींझोंपड़ी लौटा भी देती है और ज़मींदार को बदल भी देती है
तर्क: ज़मींदार के पास ताकत बहुत थी, पर वह उधार की थी — पैसे की, पद की, कागज़ की। जिस दिन उसे अपने बल पर एक टोकरी उठानी पड़ी, वह ताकत काम नहीं आई। वृद्धा के पास कुछ नहीं था, फिर भी उसने वह जीत हासिल की जो अदालत भी नहीं दिला सकती थी — हारने वाले का मन बदल जाना। जो शक्ति डर से चलती है, वह डर हटते ही खत्म हो जाती है; जो शक्ति न्याय पर टिकी है, वह उसके बाद भी बनी रहती है।
दूसरा पक्ष भी देखिए: कोई कह सकता है कि दया और न्याय हमेशा नहीं जीतते — बहुत बार ताकतवर ही जीतता है। बात सही है। पर ध्यान दीजिए, कहानी यह नहीं कहती कि दया हमेशा जीतेगी; वह यह कहती है कि जीत का जो रूप टिकाऊ है, वह यही है। इसीलिए कहानी सवा सौ साल बाद भी पढ़ी जाती है, जबकि उस ज़मींदार का अहाता कब का मिट चुका होगा।
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