प्र1.
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं। अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
उत्तर
यह साक्षात्कार (इंटरव्यू) की गतिविधि है। बातचीत से पहले प्रश्न लिखकर ले जाइए, वरना बात इधर-उधर भटक जाती है।
पूछने के लिए प्रश्न —
- आपके बचपन का घर कैसा था? कच्चा था या पक्का? कितने कमरे थे?
- यह घर कब बना? किसने बनवाया? पैसे कहाँ से जुटाए गए?
- बनाते समय क्या-क्या कठिनाई आई? किसने मदद की?
- इस मोहल्ले/गाँव में हमारा परिवार कब आया और क्यों आया?
- घर की कोई ऐसी चीज़ है जो पहले दिन से आज तक है?
- घर से जुड़ी कोई ऐसी घटना जो आपको आज भी याद है?
साक्षात्कार का ढंग —
- पहले अनुमति लीजिए और बताइए कि यह विद्यालय का काम है।
- बीच में मत टोकिए। बड़े लोग याद करते-करते बोलते हैं, उन्हें समय दीजिए।
- जो बताया जाए उसे उन्हीं के शब्दों में लिखिए — एक-दो वाक्य ज्यों-के-त्यों रखिए, वे सबसे अच्छे लगते हैं।
- हो सके तो उस समय की कोई तस्वीर या पुराना कागज़ भी देखिए।
नमूना उत्तर (एक हिस्सा): “दादी बताती हैं कि उनके बचपन का घर कच्चा था और उसकी छत खपरैल की थी। बरसात में जहाँ-जहाँ पानी टपकता, वहाँ बरतन रख दिए जाते थे और रात-भर टप-टप की आवाज़ आती रहती। यह वाला घर 1978 में बना। दादाजी ने खेत का एक हिस्सा बेचकर ईंटें खरीदी थीं और गाँव के लोग बिना मज़दूरी लिए दीवार उठाने आए थे। दादी कहती हैं — ‘घर पैसे से नहीं बनता बेटा, आदमी से बनता है।’ इस घर की सबसे पुरानी चीज़ लकड़ी का वह दरवाज़ा है जो पुराने घर से निकालकर यहाँ लगाया गया था।”
यह गतिविधि इस पाठ के साथ क्यों है: कहानी की वृद्धा का घर छिन गया और उसके साथ उसकी पूरी स्मृति भी। अपने घर की कहानी खोजते ही आपको समझ आएगा कि हर घर के पीछे किसी की मेहनत, किसी का त्याग और कई पीढ़ियों की यादें होती हैं। तभी पता चलता है कि किसी का घर छीनना असल में क्या छीनना है।